फेसबुक के जरिये करोड़ों की लॉटरी, दान और इनाम का झांसा देकर लोगों को ठगने वाले नाइजीरियाई गिरोह का सरगना केविन ब्राउन को एसटीएफ ने दिल्ली से दबोचा लिया। वह देहरादून में एक ओएनजीसी अधिकारी की पत्नी से एक करोड़ 26 लाख रुपये ठग चुका है। उसने फर्जी तरीके से दिल्ली, कोलकाता, नार्थ ईस्ट के अलावा देश के तमाम हिस्सों में 47 बैंक खाते खुलवा रखे हैं।
दून में कैंट क्षेत्र निवासी ओएनजीसी अधिकारी डिपरोक रंजन बोर ठाकुर की पत्नी बीना बोर ठाकुर से फेसबुक के जरिये हुई ठगी उत्तराखंड एसटीएफ के लिए चुनौती बन गई थी। इसे सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट पर हुई ठगी का सबसे बड़ा मामला माना जा रहा था।
एसटीएफ एसपी सदानंद दाते ने बताया कि नाइजीरिया नागरिक कैश मीयर सी माडूनाट्म उर्फ केविन ब्राउन नई दिल्ली के उत्तमनगर क्षेत्र में नवादा मेट्रो स्टेशन के पास रह रहा था। दिल्ली कोर्ट में पेशी के बाद ट्रांजिट रिमांड पर उसे दून लाया गया। कोर्ट में पेशी के बाद उसे जेल भेज दिया गया।
नाइजीरिया से होता था नेटवर्क का संचालन
गिरोह का सरगना नाइजीरिया से ही यह नेटवर्क संचालित करता था। भारत में ठगी गई रकम को नाइजीरिया स्थानांतरित कर दिया जाता। एसपी सदानंद दाते ने बताया कि इस गिरोह में नाइजीरियाई नागरिकों के साथ कुछ भारतीय भी शामिल हो सकते हैं। एसटीएफ ने नाइजीरियाई दूतावास को केविन की गिरफ्तारी की जानकारी दे दी है।
फेसबुक के आईपी एड्रेस से फंसा जालसाज
केविन ब्राउन को एसटीएफ ने फेसबुक के आईपी (इंटरनेट प्रोटोकॉल) एड्रेस केजरिए उसकी लोकेशन का पता लगाया। आखिरकार गुरुवार को उसे दबोच लिया गया। एसटीएफ सूत्रों के मुताबिक वह फरवरी 2012 में मेडिकल वीजा पर भारत आया था। वीजा अवधि पूरी होने के बाद पहचान बदलकर छिपा हुआ था।
छठी पास, अंग्रेजी फर्राटेदार
केविन छठी पास है, लेकिन अंग्रेजी फर्राटेदार बोलता है। उसकी कई गर्लफ्रेंड हैं, जिनसे वह अक्सर फेसबुक पर चैटिंग करता था।
ऐसे ठगे थे सवा करोड़
केविन रिचर्ड्स एडसन के नाम से बीना बोर ठाकुर का फेसबुक फ्रेंड बना। खुद को लंदन का व्यवसायी बताते हुए उसने भारत में ओल्ड एज होम खोलने की इच्छा जताई और करीब 10 करोड़ रुपये देने का झांसा दिया।
खुद को आरबीआई अधिकारी बताकर नेटवर्क से जुडे़ लोगों ने भी बीना से संपर्क किया। बीना को बताया गया कि लंदन से रकम को ट्रांसफर करने के लिए प्रोसेसिंग फीस के नाम अलग-अलग शहरों में बैंक खातों में एक करोड़ 26 लाख जमा करवा लिए।
जालसाजों से संपर्क अचानक बंद हुआ तो गलती का एहसास हुआ। 19 जुलाई को कैंट कोतवाली में केस दर्ज कराया गया। बाद में मामले की जांच एसटीएफ को सौंपी गई थी।