रुड़की में बुजुर्ग महिला संतोष जुल्का हत्याकांड का आरोपी पारदी गैंग जगह बदल-बदल कर वारदात को अंजाम देता है।
पारदी मध्यप्रदेश की जनजाति के लोग अपराधिक प्रवृति के होते हैं। इस जनजाति के पुरुष अपराध करते हैं और महिलाएं कोर्ट कचहरी के मसले संभालती हैं।
मध्यप्रदेश के कई जिलों में सक्रिय पारदी जनजाति का पेशा ही अपराध है। इनका अपराध करने का तरीका भी अलग है। ये घटना को अंजाम देने के बाद घटनास्थल पर कुछ खाने और शौच करने को शुभ मानते है।
इनकी बस्ती में जाने से कतराती है पुलिस
इस जनजाति के युवा अपराध करते हैं और इनकी महिलाएं कोर्ट कचहरी में पैरवी की कमान संभालती है।
पुलिस को बस्ती में आने से रोकने के लिए इनकी महिलाएं किसी भी हद तक जाने को तैयार रहती हैं यही वजह है कि इनकी बस्ती में पुलिस भी जाने से कतराती है।
मध्यप्रदेश सरकार के इनके पुर्नवास के लिए प्रयास भी किए लेकिन वो भी बेकार भी साबित हुए। पुलिस के मुताबिक ये गैंग हमेशा मूवमेंट में रहता है।
बिना आवाज हुए ग्रिल उखाड़ने की महारथ
ठीक ठाक माल हाथ लगने पर आधे सदस्य माल लेकर घर जाते है और बाकी दोबारा घटनाओं को अंजाम देने में जुटे रहते है।
नंगे पैर घटनास्थल पर दाखिल होते है और बिना आवाज हुए ग्रिल उखाड़ने की महारथ हासिल है। रुड़की में बुजुर्ग महिला के घर इसी अंदाज में वारदात को अंजाम दिया।
गिरोह की कांवड़ में वारदात का दूसरा मौका
ये दूसरा मौका है जब कांवड़ के दौरान जिले में दूसरी घटना को पारदी गैंग ने अंजाम दिया है।
ज्वालापुर की गोविंद पुरी कॉलोनी में भी उद्योगपति के घर भी कई लाख के जेवरात की चोरी को इस गैंग ने अंजाम दिया था। एसओजी ने घटना का खुलासा करते हुए कुछ आरोपियों को दबोचा था। लेकिन चोरी के जेवरात की रिकवरी बहुत कम हो पाई थी।
ऐसे खुला अनसुलझा केस
हरिद्वार पुलिस ने अनसुलझे से दिख रहे केस को अपने दिमाग की बदौलत इतनी जल्दी सुलझा लिया।
दरअसल, घटना के तुरन्त बाद घटनास्थल से मिले सुराग को देखते हुए एसओजी ने गुना पुलिस से संपर्क साधा। तब पता चला कि कुछ पारदी आजकल वेस्ट यूपी में सक्रिय है।
इधर, पुलिस ने जब सर्विलांस से पारदी गैंग के मोबाइल फोन नंबरों को खंगाला तब कुछ सदस्यों की लोकेशन हरिद्वार में पाई गई। कड़ी से कड़ी के जुड़ने पर इतनी जल्दी चुनौतीपूर्ण हत्याकांड खुलता चला गया।