साल 2014 अपराध के लिहाज से देहरादून के लिए बुरा सपना बन गया। चौरी, डकैती, हत्या, अपहरण की ताबड़तोड़ वारदातों से पुलिस चकरघिन्नी बनी रही। बदमाश वारदातों को अंजाम देकर पुलिस को छकाते रहे और पुलिस जांच के नाम पर सिर्फ लकीर पीटती रही। सबसे पहले चोरों की बारात ने पुलिस का खूब बैंड बजाया।
बेहिसाब घटनाओं से राजधानी में असुरक्षा का माहौल बन गया। कानून व्यवस्था का मुद्दा गरमाया तो सरकार को दखल देना पड़ा। तत्कालीन एसपी सिटी नवनीत भुल्लर को हटाने के साथ कई थाना प्रभारियों पर गाज गिरी।
फिर नकरौंदा में सहायक कृषि अधिकारी के आवास पर डकैती के दौरान बेटे अंकित थपलियाल की हत्या ने पुलिस और सरकार की खूब किरकिरी कराई।
एक पखवाड़े तक पुलिस के खिलाफ आंदोलन का बिगुल बजा। सीएम को पुलिस को दो बार दिए गए अल्टीमेटम से मुंह चुराना पड़ा। बिजनौर पुलिस की मदद से आरोपियों को पकड़कर पुलिस जैसे-तैसे लाज बचा पाई।
इसके बाद आदर्श नगर के चौहरे हत्याकांड ने लोगों को दहला दिया। इस बीच रिश्वतखोरी में मयूर चौकी प्रभारी के जेल जाने से भी पुलिस की साख को बट्टा लगा।