नकरौंदा कांड में फजीहत झेल रही दून पुलिस ने क्रिमिनल रिकॉर्ड्स के सहारे बीते साढ़े आठ माह में अपनी कामयाबी को दिखाया है।
शुक्रवार को जारी तीन साल के आंकड़ों में अपराधों के खुलासे और बरामदगी को उपलब्धि के तौर पर पेश किया है। इसमें जनवरी से लेकर 15 सितंबर तक के आंकड़े शामिल किए गए हैं।
जाहिर है कि पुलिस आंकड़ों की जुबानी अपनी कामयाबी की कहानी बताना चाहती है। हालांकि, उसके पास इसका कोई जवाब नहीं है कि पुलिसिंग के इतने चुस्त होते हुए भी क्राइम का ग्राफ क्यों बढ़ा?
पुलिस से जारी लूट के आंकड़ों पर गौर करें तो इस वर्ष 22 घटनाएं हुई, जबकि बीते दो वर्षों में यह आंकड़ा 19 और 13 था। चोरी के 77 मामले दर्ज किए, पिछले साल 44 चोरी दर्ज हुई थी। 2012 में यह आंकड़ा 91 तक पहुंचा था। बाकी चोरियों में इस बार 193 मामले दर्ज हुए, जबकि बीते सालों में 113 और 218 मामले पंजीकृत हुए। हत्याओं में जरूर कमी आई है।
दहेज हत्या और रेप में 100 फीसदी कामयाबी
बीते सालों में 25 और 24 हत्या की घटनाएं हुई, जबकि इस साल 19 हत्याएं हुई हैं। इनमें तीन हत्याएं पुलिस के लिए चुनौती बनी हुई हैं। बता दें कि यह वे मामले हैं, जो लिखापढ़ी में आए हैं। लूट और चोरी के कई मामले तो पुलिस डकार गई है।
आंकड़ों के मुताबिक जनवरी से अब तक दो डकैती दर्ज की गईं, जिनमें एक के खुलासे का दावा करते हुए 50 फीसदी माल बरामद किया गया। दूसरी वारदात नकरौंदा की है, जिसमें कोई सफलता नहीं मिली है। वर्ष 2013 में इस दौरान तीन, 2012 में दो डकैती हुई थी।
लूट की 22 में 21 वारदातों का खुलासा कर 95 फीसदी माल बरामद किया गया। बीते दो वर्षों में 19 में 16 और 13 में 6 लूट ही खुल सकी थी। सेंधमारी की 72 में 46 घटनाओं का खुलासा कर 60 प्रतिशत संपत्ति बरामद की गई। दहेज हत्या और बलात्कार में 100 प्रतिशत कामयाबी रही। हत्या की 19 में 16 वारदातों में हत्यारोपी जेल भेजे गए। बलवे के 69 में 67 केस में कार्रवाई की गई।
दो वर्षों की तुलना में इस वर्ष साढे़ आठ महीने में अपराध के खुलासे और बरामदगी में पुलिस अव्वल रही है। 85 फीसदी मामलों का खुलासा कर चुकी है, जबकि माल बरामदगी 54 फीसदी रही है।
- अजय सिंह, एसपी सिटी