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न्याय के मंदिर के साथ ऐसी नाइंसाफी

Mon, 09 Feb 2015 12:33 PM IST
बिशन सिंह बोरा/ अमर उजाला, देहरादून
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दूसरों को न्याय दिलाने वाले देहरादून के वकीलों के साथ ही अन्याय हो रहा है।
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पुराने जेल परिसर में एक साल पहले न्यायालय के नए भवन के निर्माण का शिलान्यास हुआ, लेकिन पत्थर लगने के बाद काम आगे नहीं बढ़ पाया। फाइलें शासन में ही धूल फांक रही हैं। एक तरह से इसे न्याय के मंदिर से नाइंसाफी ही कहा जाएगा।

वकीलों की संख्या के हिसाब से दून बार एसोसिएशन प्रदेश की सबसे बड़ी बार एसोसिएशन है। लेकिन वर्षों से प्रैक्टिस करते आ रहे सैकड़ों वकीलों के पास अपने पक्के चैंबर नहीं हैं। पार्किंग की समस्या भी बढ़ती जा रही है। इससे वकीलों के साथ हजारों वादकारियों को परेशानी उठानी पड़ रही है।
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20 अक्तूबर 2013 को पुराने जेल परिसर में हाईटेक जिला न्यायालय भवन, हाईकोर्ट गेस्ट हाउस और मध्यस्थता केंद्र का शिलान्यास तत्कालीन मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने किया था। इस कार्यक्रम पर लाखों रुपए खर्च हुए थे, लेकिन एक साल तीन महीने बाद भी निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया। कब शुरू होगा यह भी किसी को मालूम नहीं है।

ऐसा बनना है नया भवन
नए कोर्ट भवन के लिए पुरानी जेल परिसर और आसपास की 10.2 एकड़ भूमि न्याय विभाग को आवंटित की गई थी। इसमें 60 कोर्ट के अलावा वकीलों के लिए पांच हजार चैंबर प्रस्तावित हैं। साथ ही उपभोक्ता फोरम, ट्रिब्यूनल कोर्ट भवन और नीचे दो मंजिल पर पार्किंग बननी है। पूरा न्यायालय भवन, यहां तक की कोरिडोर में भी सीसीटीवी कैमरे लगने हैं। भवन पूरी एयर कंडीशन होगा।

भूमि के बारे में संशय
पुरानी जेल परिसर की जिस भूमि पर न्यायालय भवन का शिलान्यास किया गया है, वह भूमि पहले चिकित्सा शिक्षा विभाग को आवंटित की गई थी। यहां दून मेडिकल कॉलेज बनना था, लेकिन इसका प्रस्ताव ठंडे बस्ते में चला गया।

राज्य संपत्ति विभाग की ओर से यह भूमि न्यायालय भवन के लिए आवंटित की गई, लेकिन अब इस भूमि के बारे में संशय बना हुआ है। कुछ वकीलों का कहना है कि भूमि शासन ने फिर से चिकित्सा शिक्षा को दे दी है। हालांकि कोई लिखित आदेश अब तक न्यायालय कार्यालय में नहीं आया है।

न्यायालय भवन के लिए जब तक मामला उच्च न्यायालय के पास था, तेजी से काम हुआ। अब शासन मामले को देख रहा है। शासन स्तर से टेंडर के आदेश होने हैं। देरी से प्रोजेक्ट की लागत बढ़ रही है। सरकार घोषणाएं कर भूल जाती है।
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- राजीव शर्मा, दून बार एसोसिएशन के अध्यक्ष

बार काउंसिल ऑफ उत्तराखंड का हाल ही में मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव ओमप्रकाश से मिला था। प्रमुख सचिव का कहना था कि न्यायालय भवन के लिए मिली यह भूमि चिकित्सा शिक्षा विभाग को दे दी गई है।
- पृथ्वीराज चौहान, पूर्व चेयरमैन बार काउंसिल ऑफ उत्तराखंड

मैं मामले को नहीं देख रहा हूं। इस संबंध में सचिव आरके सुधांशु ही कुछ बता सकते हैं।
-ओम प्रकाश, प्रमुख सचिव
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