कोरोना काल में स्कूल खोलने की बात शुरू हुई तो अभिभावकों की चिंताएं भी सामने आईं। उनका कहना है कि निश्चित तौर पर स्कूल खोलने की जरूरत तो है लेकिन अभी खतरा भी टला नहीं है। लिहाजा, ज्यादातर अभिभावक इस पक्ष में नजर आए कि फिलहाल 9वीं से 12वीं तक के स्कूलों को खोलने के विकल्प पर ही बात की जानी चाहिए।
स्कूल कॉलेज बंद होने से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। चौबीसों घंटे घर में रहने की वजह से बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर इसका विपरीत असर पड़ रहा है। ऐसे में सरकार, शासन और शिक्षा विभाग को तमाम एहतियात के साथ स्कूल, कॉलेजों को खोल देना चाहिए। बच्चे कोरोना से बचाव के नियमों का पालन करते हुए स्कूल आएं। साथ ही सोशल डिस्टेंसिंग का भी कड़ाई से पालन करना होगा।
-डॉ मीनाक्षी सिंघल, अभिभावक
कक्षा 9 से 12 तक के छात्रों के लिए स्कूल खोले पर विचार विचार किया जा सकता है, क्योंकि बड़ी कक्षा की पढ़ाई ऑनलाइन संभव नहीं है। छोटी कक्षाओं के बच्चों को अभी स्कूल बुलाने से परहेज किया जाना चाहिए। खासकर कोरोना प्रभावित जिलों में स्कूल नहीं खोला जाना चाहिएं।
- मनमोहन जायसवाल, लखीबाग
वर्तमान में कोरोना का प्रकोप लगातार तेजी से फैल रहा है। ऐसे में स्कूल खोलने ठीक नही है। कम से कम नर्सरी से 8वीं कक्षा तक के बच्चों को स्कूल भेजना किसी खतरे से कम नहीं हैं। 9वीं से 12वीं तक विचार किया जा सकता है।
-दीपक पाल, बनियावाला
अभी स्कूलों को खासकर छोटे बच्चों की कक्षाओं को शुरू करना किसी बड़े खतरे से कम नहीं। जब तक कोरोना नियंत्रित नहीं हो जाता या इसकी कोई कारगर वैक्सीन सरलता से बाजार में या सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध नहीं आ जाती। तब तक छोटे बच्चों के स्कूलों को खोलना तो किसी भी तरह से उचित नहीं है। इससे स्थिति और बिगड़ सकती है।
-तेजेंद्र पुंडीर, नेहरू कॉलोनी निवासी एक अभिवावक