कांग्रेस विधायक दल के उप नेता करन माहरा सहित करीब आठ विधायक ऐसे भी हैं। जिन्होंने कैबिनेट के फैसले से पहले ही वेतन में कटौती पर सहमति दे दी थी। करन माहरा के मुताबिक कांग्रेस के कुछ विधायकों ने पहले ही तीस प्रतिशत वेतन कोविड-19 के तहत सीएम राहत कोष में देने का फैसला कर लिया था। इस बार उनके वेतन से यह कटौती हो भी चुकी है। विधानसभा से बताया गया कि कैबिनेट के फैसले से पूर्व करीब सात विधायकों ने यह सहमति दे दी थी।
लॉकडाउन का भी असर
मुसीबत ये भी है कि कैबिनेट के इस फैसले को अमली जामा पहनाने में लॉकडाउन भी आड़े आ रहा है। विधानसभा सूत्रों के मुताबिक कई विधायक अभी यह कह रहे हैं कि वेतन काटने की सहमति को लेकर विधानसभा अध्यक्ष तक का पत्र उन्हें मिला नहीं है। वेतन का मामला है लिहाजा सिर्फ व्हाट्सअप या फोन से सहमति भी नहीं ली जा सकती है।
हमें विश्वास में लिए बिना किया फैसला, हम क्यों माने
बिना प्रतिपक्ष को विश्वास में लिए हुए ही मंत्रिमंडल ने यह फैसला किया है, हम क्यों माने। हमसे बात करते तो हम क्या मना कर देते। प्रतिपक्ष भी एक राष्ट्रीय पार्टी है। हमें विश्वास में लेते तो हम विधायक दल की बैठक बुलाते और फैसला करते। सरकार ने पहले विधायकों से विधायक निधि से देने के लिए कहा था तो विधायकों ने पैसे दिए भी थे।
- इंदिरा हृदयेश, नेता प्रतिपक्ष
सरकार सभी फैसले प्रतिपक्ष को विश्वास में लिए बिना ही कर रही है। पहले कहा गया कि हर विधायक अपनी निधि से 15 लाख रुपये देगा। फिर कहा कि विधायक निधि से एक करोड़ काटे जाएंगे। यह हमारा अधिकार है। एक बार भी हमसे बात नहीं की गई।
- प्रीतम सिंह, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष और चकराता विधायक
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बंशीधर भगत ने सभी विधायकों का आह्वान किया है कि वे कोविड-19 महामारी से निपटने के लिए अपने वेतन और भत्तों से कटौती की सहमति का पत्र विधानसभा को जल्द से जल्द उपलब्ध करा दें।
विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल ने भी अपने स्तर पर सभी विधायकों को पत्र जारी कर वेतन भत्तों में कटौती के लिए सहमति देने का अनुरोध किया था, लेकिन अभी तक सिर्फ वरिष्ठ भाजपा विधायक हरबंस कपूर ने ही अपनी सहमति दी है। उत्तराखंड राज्य विधानसभा (सदस्यों की उपलब्धियां और पेंशन) अधिनियम 2008 की धारा 24 में यह प्रावधान है कि विधानसभा सदस्य स्वेच्छा से अपने वेतन और भत्तों में कटौती करा सकते हैं।
कैबिनेट ने फैसला तो ले लिया, लेकिन तकनीकी रूप से विधानसभा सदस्यों की इसमें सहमति जरूरी है। यही वजह है कि विधानसभा अध्यक्ष को सभी सदस्यों से जल्द से जल्द सहमति देने की अपील की गई।
सत्तारूढ़ भाजपा के विधायकों की ओर से सहमति देने में हो रही देरी के प्रश्न पर प्रदेश अध्यक्ष बंशीधर भगत ने कहा कि इस बारे में सभी को कह दिया गया है। सभी विधायकों का आह्वान किया गया है कि वे जल्द से जल्द विधानसभा को अपनी सहमति दे दें।
जल्द सहमतियां प्राप्त हो जाएंगी : अग्रवाल
विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल ने कहा कि उन्होंने सभी विधायकों के वेतन, निर्वाचन क्षेत्र व सचिवीय भत्ते में 30 फीसदी की कटौती की सहमति देने को लेकर पत्र लिखा था। उसका असर दिखाई दे रहा है। अभी उनके पास पूरी सूचना नहीं हैं, लेकिन उन्हें कई विधायकों ने फोन पर सूचित कराया है कि वे विधानसभा को अपनी सहमति दे देंगे।