दरअसल, ठेकेदारों के सामने सबसे बड़ी समस्या अधिभार चुकाने की है। अधिभार तभी चुकाया जा सकेगा जब शराब बेची जाए, लेकिन शुरुआत से ही अब तक शराब की ही किल्लत चली आ रही है। ठेके और यहां तक कि गोदाम सब खाली हैं। ऐसे में जब शराब नहीं बिकेगी तो अधिभार कहां से चुकाया जाएगा।
सरकार ने नहीं लिया फैसला फिर मुख्यालय पहुंचे ठेकेदार
शराब ठेकेदारों की मांग पर सरकार ने बुधवार को हुई कैबिनेट बैठक में भी कोई फैसला नहीं लिया है। ऐसे में नाराज ठेकेदार फिर से आबकारी मुख्यालय का दरवाजा खटखटाने को मजबूर हुए। जहां उनकी मुलाकात आबकारी आयुक्त से नहीं हो सकी। वहां केवल संयुक्त आयुक्त बीएस चौहान ही मिल सके। चौहान ने उन्हें बृहस्पतिवार को आबकारी आयुक्त सुशील कुमार से मुलाकात करने का वक्त दिया है। इसके बाद ही शराब ठेकेदार फैसला करेंगे कि ठेकों को कितने समय तक खोलना है। शराब ठेकेदार टोनी जायसवाल ने बताया कि अभी तक सभी ठेकेदारों ने 15 मई से ठेके बंद करने का निर्णय लिया है।
कोविड सेस से घट गया शराब का लाभांश
शराब पर कोविड सेस लगने से बड़ा झटका लगा है। ऐसे में व्यापारियों ने काम करने में असमर्थता जताई है। शराब कारोबारियों ने संयुक्त आयुक्त से वार्ता में लाभांश का मुद्दा भी उठाया है। उनका कहना है कि आबकारी नियम के अनुसार शराब की एमआरपी पर 20 फीसदी लाभांश रहता था। मगर अब कोविड सेस लगा दिया गया है। इसके बाद लाभांश केवल 16 फीसदी रह गया। ऐसे में अब कारोबार करना बहुत मुश्किल हो गया है। संयुक्त आयुक्त से मिलने वालों में टोनी जैसवाल, पवन जैसवाल, प्रतीक आदि कारोबारी शामिल थे।