रामनगर में पीपीपी मोड पर संचालित सरकारी अस्पताल को एक महीने पहले ही पांच वेंटिलेटर मिल चुके थे लेकिन इनका अभी तक इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है। बुधवार को डीजी हेल्थ के निरीक्षण के दौरान थलीसैंण पौड़ी गढ़वाल से मरीज को लेकर आए तीमारदार की शिकायत के दौरान इसका खुलासा हुआ। तीमारदार ने डीजी हेल्थ को बताया कि वह जिस मरीज को लेकर आया है, उसकी हालत खराब है। उसका कोरोना टेस्ट किया गया लेकिन यहां वेंटिलेटर न होने पर मरीज को हल्द्वानी रेफर किया जा रहा है।
इस पर डीजी हेल्थ ने अस्पताल के चिकित्साधीक्षक डॉ. मणि भूषण पंत से पूछा कि जब एक माह पहले पांच वेंटिलेटर अस्पताल को मिले हैं, तो फिर क्यों नहीं लगाए गए। चिकित्साधीक्षक ने बताया कि वेंटिलेटर लगाने वाले इंजीनियर अभी नहीं आए हैं, जो जल्द आएंगे। वहीं, डीजी हेल्थ ने डॉक्टरों को निर्देश दिए कि जब तक कोरोना रिपोर्ट न आ जाए तब तक किसी भी मरीज को हल्द्वानी न भेजा जाए।
पीपीपी मोड पर संचालित सरकारी अस्पताल का बुधवार को डीजी हेल्थ ने निरीक्षण किया। इस दौरान डॉक्टर और आशा वर्कर ड्रेस में नहीं दिखे तो डीजी हेल्थ ने फटकार लगाते हुए ड्रेस पहनने की हिदायत दी। उन्होंने बाद में मरीजों का हालचाल भी जाना।
स्वास्थ्य विभाग की कुमाऊं निदेशक शैलजा भट्ट ने सुबह सभी चिकित्सकों की ओपीडी में जाकर जांच-पड़ताल की। उन्होंने देखा कि डॉक्टर किस तरह से मरीजों की जांच कर रहे हैं और क्या-क्या परामर्श एवं दवाइयां मरीजों को दे रहे हैं। इसके बाद महिला वार्ड में भर्ती मरीजों का हाल जाना। डीजी हेल्थ के अनुसार अस्पताल अब पीपीपी मोड पर चल रहा है। अस्पताल मरीजों को किस तरह का उपचार दिया जा रहा है, इसकी जांच पड़ताल के लिए निरीक्षण किया।
डीजी हेल्थ के सामने आया किडनी प्रकरण
अस्पताल में भर्ती एक गर्भवती महिला की अस्पताल की लैब में जांच हुई, जिसमें उसकी एक किडनी होने की बात सामने आई थी। इस पर महिला ने काशीपुर में जांच कराई तो पता चला कि उसकी दोनों किडनियां सुरक्षित हैं। इस पर डीजी हेल्थ ने कहा कि अभी मामला उनके संज्ञान में नहीं है। इस प्रकरण की जांच की जाएगी।