दून मेडिकल कॉलेज के चिकित्सकों का कहना है कि अध्ययन के नतीजों के तौर पर यह बात सामने आई है कि अगर कोई भी व्यक्ति पहले से किसी मर्ज का शिकार है तो वह खुद ही होम आईसोलेशन में न रहे। इसके बजाए कोरोना के लक्षण दिखते ही तुरंत अस्पताल में अपनी जांचें कराए। इसके बाद अगर चिकित्सक कहें, तभी होम आईसोलेशन में रहें। चिकित्सकों का यह भी कहना है कि अगर आपकी आयु 60 वर्ष से अधिक है तो नियमित अपनी जांचें कराते रहें।
लापरवाही, नीम-हकीम, देरी भी बनी मौत का कारण
दून अस्पताल के अध्ययन में यह बात भी सामने आई है कि करीब 34 प्रतिशत मरने वाले मरीज ऐसे हैं, जो कि या तो देरी से इलाज के लिए पहुंचे या फिर जिन्होंने खुद ही घर पर दवाईयां लीं। ऐसे भी कुछ मरीज हैं जो कि कहीं और से रेफर होने के बाद दून अस्पताल पहुंचे। 34 प्रतिशत मरीज ऐसे रहे जो कि भर्ती होने के महज 24 घंटे के भीतर ही मर गए।
कोरोना के इलाज के दौरान तमाम तरह के तथ्य सामने आ रहे हैं। अब तक जिन 130 कोरोना संक्रमितों की मौत हो चुकी है, उनके अध्ययन में शुगर के करने वाले मरीज सबसे अधिक पाए गए हैं। हमारे चिकित्सकों की टीम अभी कोरोना को लेकर और स्टडी कर रही है।
-डॉ. आशुतोष सयाना, प्रिंसिपल, राजकीय दून मेडिकल कॉलेज