उत्तराखंड में कोरोना संक्रमण से मृत्यु दर रोकने में चमोली जिला अव्वल है। कोरोना काल में अब तक इस जिले में एक भी कोरोना संक्रमित मरीज की मौत नहीं हुई है। चमोली में कुल 1162 संक्रमितों में 908 मरीज ठीक भी हो चुके हें। वर्तमान में 254 सक्रिय मरीजों का उपचार किया जा रहा है।
प्रदेश में कोरोना संक्रमण काल को 207 दिन पूरे हो गए हैं। वर्तमान में संक्रमित मरीजों की संख्या 52 हजार से ज्यादा हो गई हैं। वहीं, कोरोना मरीजों की मृत्यु दर लगातार बढ़ रही है। प्रदेश में चमोली मात्र एक ऐसा जिला हैं, जहां पर अभी तक किसी संक्रमित की मौत नहीं हुई है। प्रदेश में पहले कोरोना मरीज की मौत 29 अप्रैल को हुई थी।
वहीं, 18 जुलाई तक प्रदेश में मरने वालों की संख्या 52 थी। अनलॉक-1 के बाद संक्रमित मामलों में तेजी आने के साथ ही मरने वालों का आंकड़ा बढ़ा है। अब तक 677 मरीजों की मौत हो चुकी है। सबसे ज्यादा देहरादून जिले में 325 मौतें हुई है। जबकि नैनीताल में 123, हरिद्वार में 105, ऊधमसिंह नगर में 68 कोरोना मरीजों की मौत हुई है।
पर्वतीय जिलों में सबसे अधिक पौड़ी में 20 मरीजों की मौत हुई है। उत्तरकाशी में नौ, अल्मोड़ा में आठ, टिहरी में चार, रुद्रप्रयाग में दो, पिथौरागढ़ में पांच, बागेश्वर में चार, चंपावत जिले में चार की मौत हुई है। पहाड़ों की तुलना में मैदानी जिलों में कोरोना से मृत्यु दर अधिक है।
कोविड केयर सेंटरों में अनियमितताएं मिलने पर सीडीओ ने काशीपुर के दो कोविड सेंटरों को नोटिस जारी किए हैं। दोनों सेंटरों के संचालकों से तीन दिनों के भीतर स्पष्टीकरण तलब किया है।
नैनीताल हाईकोर्ट के निर्देश पर गठित तीन सदस्यीय समिति ने 6 अक्तूबर को रामनगर रोड स्थित अनन्या व बाजपुर रोड पर गौतमी हाइट्स में बनाए गए कोविड केयर सेंटरों का निरीक्षण किया था। निरीक्षण को पहुंचे जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव अविनाश श्रीवास्तव, डिप्टी कलक्टर नरेश दुर्गापाल, जिला बार एसोसिएशन अध्यक्ष दिवाकर पांडे ने मरीजों को दिए जाने आहार, सफाई, रसोई और दवाइयों की गुणवत्ता आदि के बारे में जानकारी ली। टीम ने रसोई में खाद्य सामग्री की गुणवत्ता भी परखी। इस दौरान फ्रिज में रखी सब्जियों में दुर्गंध पाई गई।
जांच समिति की रिपोर्ट का संज्ञान लेते हुए सीडीओ एवं डीसीसीसी के नोडल अधिकारी हिमांशु खुराना ने दोनों होटलों के प्रबंधकों को नोटिस जारी कर तीन दिन के भीतर स्पष्टीकरण देने को कहा है। नोटिस में कहा गया है कि संतोषजनक स्पष्टीकरण न मिलने पर होटल प्रबंधकों और व्यवस्थापकों के खिलाफ आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाएगी।