स्टाफ में ऐसा जुनून है कि किसी भी हाल में मरीज को अंदर से कमजोर नहीं होने दिया जाए। बस कोरोना रूपी दानव से बचाकर उन्हें घर भेजने की ललक है। इससे इतर, मरीज को अपनों से दूर रहकर कोई डर न सताए, इसलिए दवा की ही तरह पूरा ध्यान रखा जा रहा है। दवा के साथ अपनत्व की डोज ने मरीज और स्टाफ के बीच ऐसा रिश्ता बना लिया है कि वे तीन से चार दिन में ही ठीक हो जा रहे हैं।
कोविड केयर सेंटर में मरीजों की सेवा में लगा एक ऐसा चेहरा है, जिसका हर मरीज फैन है। यह हैं विधायक प्रदीप बत्रा के निजी सेक्रेटरी मयंक मेंदीरत्ता। वह भर्ती होने से लेकर छुट्टी मिलने तक हर मरीज का दिन में चार से पांच बार हाल पूछते हैं। कहते हैं कि घबराइए मत हम सब आपके साथ हैं। कोरोना आपका कुछ नहीं बिगाड़ पाएगा, ये तो मामूली संक्रमण है। इतना ही नहीं मरीजों के परिजनों को भी फोन पर ऑल इज वेल बोलकर उनकी हर शंका दूर करते हैं।
सफाई व्यवस्था दिखा रही बड़े अस्पतालों को आइना
कोविड केयर सेंटर में सफाई का विशेष ध्यान रखा जा रहा है। दिन हो या रात, कम से कम दस बार सफाई होती है जबकि दो से तीन बार सैनिटाइजेशन किया जाता है। यहां आने वाला हर शख्स कहता है कि कोविड सेंटर अस्पतालों को आइना दिखा रहा है।
ये हैं कोविड सेंटर के हीरो
कोविड केयर सेंटर में विधायक प्रदीप बत्रा ने अपना स्टाफ में लगाया है। इनमें मयंक मेंदीरत्ता, प्रेमनाथ सेठी, मोनू कुमार, विशाल, सत्यम, किशोर राणा, उज्ज्वल, सार्थक, अमित पाटिल, भूपेंद्र, मुकेश, सूरज संजय सैनी शामिल हैं।