कोरोना काल में संवेदनाएं दम तोड़ रही हैं। अपने अपनों से दूरी बना रहे हैं। कोरोना के इस क्रूर काल में कुछ युवा ऐसे भी हैं, जो न केवल इंसानियत की मिसाल पेश कर रहे हैं, बल्कि समाज को आईना भी दिखा रहे हैं।
उत्तराखंड में ब्लैक फंगस : दो और मरीजों में ब्लैक फंगस की पुष्टि, दो संदिग्ध मरीज भी मिले
हम बात कर रहे हैं सुलेमान, नवाब और मुराद हसन की। ये तीनों युवा टीम विरेंद्र सिंह बॉबी का हिस्सा हैं, जो कोराना काल में ऐसे शवों का दाह संस्कार कर रही है, जिनके लिए अपने आगे नहीं आ रहे हैं। शुक्रवार को ईद थी। तीनों युवा घर पर अपनों के साथ ईद मना रहे थे। शाम को अंधेरा होने को था।
उत्तराखंड : शादी में शामिल होने के लिए निगेटिव रिपोर्ट जरूरी करने की तैयारी, कर्फ्यू एक सफ्ताह बढ़ाने के संकेत
उन्हें फोन आया कि एक संक्रमित शव का अंतिम संस्कार होना है, जिस पर तीनों बिना देर किए शमशान घाट पहुंचे और अंतिम संस्कार की प्रक्रिया को संपन्न कराया। ये युवा अब तक नौ अंतिम संस्कार करा चुके हैं। रोजे के दौरान भी इन युवाओं ने अंतिम संस्कार कर इंसानियत की मिशाल पेश की थी।
तीनों युवाओं का कहना है कि त्यौहार से बढ़ कर इंसानियत है। इंसानियत से बड़ा कोई धर्म नहीं है। उधर, विधायक मुन्ना सिंह चौहान ने भी युवाओं के इस कदम को साहसिक और मानवता वाला बताया। उन्होंने कहा कि ये युवा समाज के लिए प्रेरणा हैं।
श्यामपुर चौकी पुलिस ने निभाया मानवता का धर्म
ऋषिकेश की श्यामपुर चौकी पुलिस ने कोतवाली पुलिस के सहयोग से मिशन हौसला के तहत कोरोना संक्रमित बुजुर्ग महिला का मुनिकीरेती स्थित पूर्णानंद घाट पर दाह संस्कार कर मानवता का धर्म निभाया।
कोतवाली पुलिस ने बताया कि उन्हें शनिवार शाम को मोहन सिंह निवासी प्रेमविहार कॉलोनी, श्यामपुर ऋषिकेश ने सूचना दी कि उनकी पत्नी बबीता रावत (75) पिछले कुछ समय से करोना पॉजिटिव चल रही थी। जिनकी तबीयत अधिक खराब होने के कारण उनका स्वर्गवास हो गया है। अकेला बुजुर्ग एवं आर्थिक स्थिति सही न होने के कारण वे उनका अंतिम संस्कार करने में असमर्थ है।
सूचना मिलने पर कोतवाली प्रभारी निरीक्षक रितेश शाह ने श्यामपुर चौकी पुलिस को निजी खर्चे से सारी व्यवस्था कर महिला का संस्कार करने के निर्देश दिए। श्यामपुर चौकी पुलिस ने पीपीई किट पहनकर पूर्णानंद घाट पर सम्मान के साथ महिला का अंतिम संस्कार किया।