कोरोना संक्रमण के कारण मेले सांकेतिक रूप से मनाए जा रहे हैं या फिर पूरी तरह से स्थगित कर दिए गए हैं। ऐसे में पूरे जिले में करीब 60 लाख से अधिक के नुकसान का अनुमान है। पिथौरागढ़ में सातू-आठू, हिलजात्रा, हिरन के अलावा, ऋषि पंचमी पर पिथौरागढ़ के मोस्टमानू और बेड़ीनाग में भी बड़ा मेला आयोजित होता था।
इन मेलों में सैकड़ों दुकानें लगती थीं, जिनमें लाखों की बिक्री होती थी। इस बाद मेला आयोजित न होने से दुकानें नहीं लगी। मड़मानले का लछैर का मेला, कनालीछीना का घाड़ी मेला और सिंगाली का धनलेक का मेला भी इस बार कोरोना के कारण नहीं होगा। यह तीनों मेले ऐसे हैं, जिनमें स्थानीय स्तर से ही नहीं बल्कि मैदानी क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में व्यापारी दुकानें लगाने आया करते थे। जिले के गंगोलीहाट, थल, डीडीहाट में भी मेलों का आयोजन होता है।
अल्मोड़ा में मेले न होने से दो करोड़ से अधिक का नुकसान
कोरोना के कारण मेले और महोत्सवों का आयोजन प्रभावित होने से अल्मोड़ा जिले में करीब 2 करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान है। अल्मोड़ा के प्रसिद्ध जागेश्वर धाम में एक माह तक लगने वाले श्रावणी मेले में बाहर से भी काफी संख्या में व्यापारी पहुंचते थे। 40 से 50 लाख रुपये लाखों का कारोबार होता था। जागेश्वर मंदिर प्रबंधन समिति के अध्यक्ष भगवान भट्ट ने बताया कि इस बार व्यावसायिक गतिविधि ठप रहने से कारोबारियों के साथ ही मंदिर समिति की आय भी प्रभावित हुई है।
वहीं अल्मोड़ा के प्रसिद्ध नंदादेवी मेले में हर साल मुरादाबाद, रामपुर, विलासपुर, मेरठ, हल्द्वानी से कारोबारी दुकानें लगाते थे। मुख्य संयोजक मनोज सनवाल के मुताबिक इस बार मेले में व्यावसायिक गतिविधि नहीं होने से बाहर के और स्थानीय व्यापारियों को करीब 50 लाख का नुकसान उठाना पड़ा। इसी तरह जिले के कई स्थानों में मेले और महोत्सव होते थे। कोरोना के कारण ये आयोजन या तो स्थगित हो गया या सांकेतिक रूप से मनाए गए, जिससे व्यवसाय को लाखों की चपत लगी है।
मेले न होने से स्थानीय व बाहरी दुकानदारों को हुआ भारी नुकसान
कोरोनाकाल के लॉकडाउन के चलते क्षेत्र में होने वाले मेलों से होने वाली दुकानदारों की आमदनी भी काफी प्रभावित हुई है। द्वाराहाट में पांच दिन तक होने वाले स्याल्दे बिखौती मेले में दुकान लगाने वाले बाहरी और स्थानीय दुकानदारों सहित कुल दो सौ दुकानदारों को करीब 40 लाख रुपये का नुकसान हुआ है।
इसी तरह पांच दिन तक चलने वाले चौखुटिया के चैत्राष्टमी मेले में दुकान लगाने वाले करीब सवा सौ दुकानदारों को औसतन 25 लाख रुपये का नुकसान हुआ। इसी तरह हफ्तेभर तक चलने वाले मासी के सल्टिया सोमनाथ मेले में दुकान लगाने वाले करीब सौ दुकानदारों को करीब 15 लाख रुपये तक का नुकसान हुआ है।
मेले और महोत्सवों का आयोजन न होने से व्यवसायियों को करीब दो करोड़ रुपये की चपत लगी है। बागेश्वर में नंदा महोत्सव, गरुड़ के कोटभ्रामरी मंदिर में लगने वाला मेला, ऋषि पंचमी को बिजयपुर के धौलीनाग मंदिर और कपकोट के पोथिंग के भगवती मंदिर में मेलों का आयोजन होता था। लेकिन, इस बार कोरोना का ऐसा ग्रहण पड़ा कि मेले प्रभावित हो गए। आर्थिक चपत लगने से व्यवसायी मायूस हैं। इधर कोरोना के चलते रामलीला के भी प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है।
नैनीताल में साढ़े छह करोड़ का कारोबार प्रभावित
नैनीताल और भीमताल में हर साल लगने वाले प्रसिद्ध मेले इस बार कोरोना की भेंट चढ़ गए, जिस कारण जहां एक ओर दोनों जगह निकायों को लाखों रुपये राजस्व का नुकसान पहुंचा है। वहीं करीब साढ़े छह करोड़ का कारोबार भी प्रभावित हुआ है।
नैनीताल में नंदा देवी महोत्सव के अतिरिक्त दुर्गा पूजा महोत्सव आयोजित किया जाता है। दोनों महोत्सवों में 4 से 5 दिन के मेले लगते हैं। नगर पालिका से प्राप्त जानकारी के मुताबिक नंदा देवी महोत्सव और दुर्गा पूजा महोत्सव में लगने वाले मेलों से पालिका को 60 से 70 लाख रुपये की आय होती थी लेकिन इस बार कोरोना के चलते पालिका इससे वंचित रही है।
वहीं दूसरी ओर फ्लैट्स मैदान पर लगने वाले इन दोनों मेलों में 700 से अधिक छोटी बड़ी दुकानें लगती हैं जिनमें 4 से 5 करोड़ रुपये का कारोबार होता था, जो इस बार नहीं हो सका। इसी तरह भीमताल में हरेले के अवसर पर लगने वाले मेले में 300 से अधिक दुकानें लगती थीं, जिनमें डेढ़ करोड़ से अधिक का कारोबार होता था। नैनीताल नगर पालिका के ईओ अशोक कुमार वर्मा व नगर पंचायत भीमताल के ईओ विजय बिष्ट बताते हैं कि मेलों के न लगने से निकायों की सालाना आय घटी है।