राजकीय दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल के सांस एवं छाती रोग विभाग के विभागाध्यक्ष एवं कोरोना के नोडल अफसर डॉ. अनुराग अग्रवाल ने बताया कि सतह से संक्रमण फैलने की थ्योरी के पुख्ता प्रमाण नहीं हैं। यह थ्योरी अब लगभग अस्वीकार हो रही है। ऐसे में शव को छूने से संक्रमण का जोखिम बहुत कम रहता है।
फिर भी वे कोरोना संक्रमित के शव को मोर्चरी से ले जाने से लेकर अंतिम संस्कार तक में गाइडलाइन का पालन करने की सलाह देते हैं। डॉ. अनुराग अग्रवाल ने बताया कि संक्रमित मरीजों के शव को कंधा देने या उनके अंतिम संस्कार में दूरी बनाना बहुत ही गलत बात है। अस्पताल और पुलिस के कर्मचारी भी ऐसे शवों को अंतिम संस्कार के लिए ले जाते हैं।
डॉ. मुशीर अंजुम करा रहे शवों का अंतिम संस्कार
महामारी के दौर में कुछ लोग ऐसे भी भी हैं जो हर जरूरतमंदों की मदद में जुटे हैं। इन्हीं में शामिल हैं डॉ. मुशीर अंजुम और उनकी टीम। उनकी टीम कोरोना पीड़ित मृत लोगों का अंतिम संस्कार करा रही है। कोरोना पीड़ित ओएनजीसी से सेवानिवृत कर्मचारी की मौत होने पर उन्होंने उनका अंतिम संस्कार कराया। इस कार्य में महानगर कांग्रेस अध्यक्ष लालचंद शर्मा ने भी मदद की। लालचंद शर्मा ने बताया कि डॉ. मुशीर की टीम में डॉ. असरफ खान, नितिन कुमार, बल्वेन्दर सिंह, उजेर अंजुम आदि शामिल हैं। उजेर अंजुम रोजे में रहकर भी मानवता निभा रहे हैं।