सूत्रों के मुताबिक, केंद्रीय नेतृत्व को भी यह फीडबैक पहुंचा है कि कोरोना संकट का सामना कर रहे राज्य के लोगों को राजनीतिक दलों के लोगों से मदद की बहुत आस है। उनकी नाराजगी विधानसभा चुनाव में भारी पड़ सकती है।
इस बात का एहसास पार्टी के विधायकों को भी होने लगा है।
नाम न बताने की शर्त पर एक विधायक का कहना था कि कोरोना संक्रमण के फैलाव ने सारे राजनीतिक समीकरण गड़बड़ा दिए हैं। जिन विकास कार्यों के दम पर वे दोबारा चुनाव जीतने की सोच रहे थे, उन्हें कोरोना संकट ने धो डाला है। अब जनता यह देख रही है कि कौन नेता उनके साथ संकट में खड़ा है और उनका मददगार है।
वह कोरोना संक्रमण से लगातार हो रही मौतों को लेकर भी चिंतित हैं। वह कोरोना की तीसरी लहर से भी सहमे हैं। उनका कहना है कि जब दूसरी लहर में हालात इतने गंभीर हैं तो तीसरी लहर में क्या स्थिति होगी, इसकी कल्पना नहीं की जा सकती। सियासी जानकारों का भी कहना है कि अगले छह महीने में राज्य में कोरोना संक्रमण के हालात सामान्य हुए, तो भी विधानसभा चुनाव में यह बहुत बड़ा मुद्दा होगा।