एनजीओ के नाम पर भी कुछ लोग दिन से लेकर रात-रात तक मोबाइल कॉल कर रहे हैं। जो नंबर उनके द्वारा बताया जा रहा है उन पर कॉल करने पर न तो यह बताते हैं कि मरीज किस अस्पताल में भर्ती है या कहां है और न उसकी असल स्थिति की जानकारी देते हैं। ऐसे में किसी गिरोह के संचालित होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। लोगों को चाहिए कि संबंधित जिले के अधिकृत सरकारी पोर्टल के माध्यम से बेड और अन्य व्यवस्थाओं का पता कर लें। किसी भी तरह से झांसे में न आएं।
- डॉ. अजीत गैरोला, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक सीएमआई अस्पताल
बेड की उपलब्धता के बारे में तमाम जगह से कॉल आ रही हैं। देहरादून शहर के बाहर से भी कॉल आ रही हैं। मरीज की असल स्थिति और अस्पताल में बेड की उपलब्धता जानने के बाद ही उन्हें अस्पताल आने के बारे में कहा जाता है।
- भूपेंद्र रतूड़ी, वरिष्ठ जनसंपर्क अधिकारी श्री महंत इंद्रेश अस्पताल
महामारी के इस विकट दौर में भी कुछ जालसाज मरीजों और उनके परिजनों से जालसाजी करने से बाज नहीं आ रहे हैं। पुलिस इस तरह के लोगों पर बारीकी से निगाह बनाए हुए है। साथ ही मरीजों और उनके तीमारदारों के परिजनों से भी अपील की जाती है कि ब्लड प्लाज्मा या अन्य किसी व्यवस्था के नाम पर बिना पूरी पड़ताल के किसी भी तरह का लेनदेन न करें। न ही किसी अनाधिकृत लिंक को खोलें। संदेह होने पर पुलिस को भी सूचित करें। ताकि जालसाजी करने वालों पर शिकंजा कसने में मदद मिल सके।
- डॉ. योगेंद्र सिंह रावत, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक