फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

हरिद्वार : वेंटिलेटर के लिए मुट्ठी में रुपये लेकर अस्पतालों के चक्कर काटे, नहीं काम आई भाजपा अध्यक्ष की सिफारिश, भाई चल बसा

Tue, 27 Apr 2021 01:00 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, हरिद्वार

सार

नहीं काम आई भाजपा प्रदेश अध्यक्ष की सिफारिश, हरिद्वार और देहरादून में कही नहीं मिला बेड, बुखार और खांसी के बाद ऑक्सीजन लेवल 50 पहुंचा तो हरिद्वार से हायर सेंटर रेफर किया गया
विज्ञापन
प्रतीकात्मक तस्वीर
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

बुखार और खांसी के बाद ऑक्सीजन लेवल 50 पहुंचने के बाद एक युवक जिंदगी और मौत से जंग लड़ रहे अपने बड़े भाई को बचाने के लिए मिन्नतें करता रहा। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष की सिफारिश भी लगाई।

विज्ञापन


कोरोना कर्फ्यू : कोरोना को मात देने के लिए शाम सात बजते ही उत्तराखंड के कई शहरों में पसरा सन्नाटा, तस्वीरों में देखें

रातभर हरिद्वार से लेकर देहरादून तक दस अस्पतालों की चौखट पर मुट्ठी में रुपये पकड़े एक अदद वेंटिलेटर के लिए गिड़गिड़ाता रहा, लेकिन कहीं वेंटिलेटर नहीं मिला। आखिरकार रात दो देहरादून में एक अस्पताल के बाहर मरीज के सांसों की डोर टूट गई।
विज्ञापन


उत्तराखंड : 24 घंटे में 67 की मौत, 5058 लोग मिले कोरोना संक्रमित, सक्रिय मामले 39 हजार पार

शिवालिक नगर निवासी हार्डवेयर व्यापारी गणाराम चौधरी (38) बीते बुधवार से बीमार थे। उनको बुखार और खांसी थी। स्थानीय डॉक्टर से दवा ली तो उन्हें कुछ राहत मिली, लेकिन रविवार को गणाराम की तबीयत अचानक खराब हो गई। उनको सांस लेने में तकलीफ होने लगी।

गणाराम के भाई मोहित चौधरी शाम सात बजे उनको लेकर चंद्राचार्य चौक स्थित सिटी अस्पताल पहुंचे। यहां जांच के दौरान मरीज का ऑक्सीजन लेवल 50 पाया गया। अस्पताल प्रशासन ने मरीज को हायर सेंटर ले जाने के लिए कहा।

विज्ञापन

ऑक्सीजन लेवल गिरकर 32 पहुंच गया

मोहित अपने भाई को लेकर कनखल स्थित रामकृष्ण मिशन अस्पताल पहुंचे। यहां मरीज का ऑक्सीजन लेवल गिरकर 32 पहुंच गया। यहां भी मरीज को हायर सेंटर ले जाने की सलाह दी गई। मोहित ने अपने रिश्तेदारों से वेंटिलेटर ढूंढने के लिए संपर्क किया, लेकिन कहीं बेड नहीं मिला।

थक हारकर उन्होंने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं नगर विधायक मदन कौशिक केे कोविड हेल्पलाइन पर संपर्क किया। यहां से उन्हें सीएमआई अस्पताल देहरादून जाने की सलाह दी गई, लेकिन देहरादून पहुंचने पर पता चला कि सीएमआई में भी वेंटिलेटर खाली नहीं है।

इसके बाद होशोहवास खो चुके मोहित मुट्ठी में रुपये पकड़े अपने भाई को लेकर एक के बाद एक सात और अस्पतालों में गए, लेकिन कहीं वेंटिलेटर नहीं मिला। आखिर रात दो बजे देहरादून में एक अस्पताल के बाहर ही गणाराम की मौत हो गई। देर रात उनका शव हरिद्वार लाया गया। सोमवार को कनखल श्मशान घाट पर कोविड गाइडलाइन के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें