जिला संक्रमित
देहरादून 68
ऊधमसिंह नगर 74
हरिद्वार 109
नैनीताल 96
उत्तरकाशी 34
टिहरी 30
बागेश्वर 21
चमोली 09
अल्मोड़ा 05
पौड़ी 02
पिथौरागढ़ 02
प्रदेश के पर्वतीय जिलों में कोरोना की संक्रमण दर कम हुई है और मैदानी जिलों में संक्रमण दर बढ़ी है। बीते तीन सप्ताह में प्रदेश की संक्रमण दर 0.76 प्रतिशत बढ़ी है। नैनीताल जिले में संक्रमण की दर 1.8 प्रतिशत से बढ़ कर 7.74 प्रतिशत पहुंच गई है। जो प्रदेश में सबसे अधिक है।
उत्तराखंड में लगातार संक्रमित मामले सामने आने से संक्रमण दर लगातार बढ़ रही है। 16 जुलाई को प्रदेश की संक्रमण दर 3.99 प्रतिशत थी। यह बढ़ कर 4.75 प्रतिशत पहुंच गई है। प्रदेश के मैदानी जिले हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर, नैनीताल और देहरादून की संक्रमण दर में बढ़ोतरी हुई है। बीते तीन सप्ताह में हरिद्वार जिले में संक्रमण दर 3.03 प्रतिशत, ऊधमसिंह नगर में 1.73 प्रतिशत, नैनीताल में 1.8 प्रतिशत, देहरादून जिले में 1.26 प्रतिशत बढ़ी है।
टिहरी, अल्मोड़ा और बागेश्वर जिले में संक्रमण की दर कम हुई है। टिहरी में 4.26 प्रतिशत, अल्मोड़ा में 1.72 प्रतिशत और बागेश्वर जिले में 1.03 प्रतिशत संक्रमण दर घटी है।
कोरोना आंकड़ों का अध्ययन कर रहे सोशल डेवलपमेंट फॉर कम्युनिटी फाउंडेशन के संस्थापक अनूप नौटियाल का कहना है कि पर्वतीय जिलों में संक्रमण दर कम होना अच्छे संकेत हैं। संक्रमण दर से यह पता चलता है कि सैंपल टेस्ट में कितने लोग कोरोना पॉजिटिव मिल रहे हैं।
प्रदेश सरकार का मानना है कि कोरोना संक्रमितों के इलाज को लेकर निजी अस्पतालों का रुख बहुत सकारात्मक नहीं है। भविष्य में हालात काबू से बाहर हुए तो निजी अस्पतालों पर भी सरकार शिकंजा कसेगी। यह संकेत मुख्य सचिव ओम प्रकाश ने दिए हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार ने कोरोना संक्रमितों का इलाज निजी अस्पतालों में कराने का निर्णय लिया है। लेकिन निजी अस्पतालों का सकारात्मक रुख नहीं है। निजी अस्पतालों में सामान्य रोगी यदि कोरोना संक्रमित हो रहे हैं, तो वहां से सरकारी कोविड अस्पतालों में भेज दिए जा रहे हैं। क्या निजी अस्पतालों पर सरकार कोई कार्रवाई करेगी? इस प्रश्न के जवाब में मुख्य सचिव ने कहा कि आगे चलकर यदि हालात बेकाबू होते हैं, तो इस बारे में भी विचार किया जाएगा।
होम आइसोलेशन की जरूरत नहीं
कई राज्यों में कोरोना संक्रमितों को होम आइसोलेशन की सुविधा दी गई है, क्या राज्य सरकार भी इस विकल्प पर विचार करेगी, इस प्रश्न के उत्तर में मुख्य सचिव ने कहा कि उत्तराखंड की स्थिति दूसरे राज्यों से बेहतर है। राज्य में संक्रमितों के इलाज के लिए अभी पर्याप्त इंतजाम हैं। इनमें लगातार विस्तार किया जा रहा है। जब तक बेहतर देखरेख के इंतजाम हैं, तब तक इसकी जरूरत नहीं है।
राज्य में सामुदायिक संक्रमण नहीं
मुख्य सचिव ने कहा कि राज्य में सामुदायिक संक्रमण की स्थिति नहीं है। मामले इसलिए बढ़े हैं क्योंकि काफी संख्या में लोग बाहर से आ रहे हैं। कोरोना संक्रमितों के रिकवरी रेट में सुधार हो रहा है। बुधवार को 246 नए केस आए, जबकि 386 ठीक हुए। 5233 संक्रमित ठीक हो चुके हैं। 2,885 एक्टिव केस हैं। डबलिंग रेट 30 दिन का है, जो दूसरे राज्यों से बेहतर है।
बहुत सख्त नहीं हो सकती सरकार
मुख्य सचिव ने कहा कि कोविड-19 महामारी को लेकर सरकार बहुत सख्त नहीं हो सकती। उसे आर्थिक गतिविधियों को भी जारी रखना है। दो महीने के लॉकडाउन में काफी नुकसान हुआ है। जीएसटी का 80 प्रतिशत लक्ष्य ही प्राप्त कर सके। इसलिए संतुलन बनाते हुए अनलॉक की प्रक्रिया अपनाई जा रही है।
बृहस्पतिवार को जिले में कोरोना संक्रमित चार मरीजों की मौत हो गईं। इनमें से दो दून अस्पताल और दो एम्स ऋषिकेश में भर्ती थे। जिले में अब तक 54 लोगों की कोरोना से मौत हो चुकी है। दून अस्पताल में पहली मौत रिस्पना पुल स्थित चकशाह नगर (विधानसभा के सामने) निवासी 76 वर्षीय बुजुर्ग की हुई। बुजुर्ग कई अन्य गंभीर बीमारियों से भी पीड़ित थे।
परिजनों ने उन्हें 26 जुलाई को राजकीय दून मेडिकल अस्पताल में भर्ती कराया था। हालत गंभीर होने पर डॉक्टरों ने आईसीयू में भर्ती किया। लेकिन, बृहस्पतिवार को इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। इसके अलावा मोती बाजार निवासी 66 वर्षीय महिला ने भी दम तोड़ दिया।
परिजनों ने उन्हें करीब दो-तीन दिन पहले पटेलनगर स्थित निजी अस्पताल में भर्ती कराया था। बुधवार देर रात हालत बिगड़ने पर महिला को दून अस्पताल रेफर किया गया। जहां कुछ ही देर में उन्होंने दम तोड़ दिया।
कोरोना के स्टेट को-ऑर्डिनेटर एवं राजकीय दून मेडिकल अस्पताल के डिप्टी एमएस डॉ. एनएस खत्री ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग और पुलिस की मदद से दोनों का अंतिम संस्कार कर दिया गया है। उधर, एम्स ऋषिकेश में दो कोरोना पॉजिटिव मरीजों की मौत हो गई। इनमें नजीबाबाद निवासी 58 वर्षीय व्यक्ति और रुड़की निवासी 53 वर्षीय मरीज शामिल हैं। दोनों मरीज कई और गंभीर बीमारियों से पीड़ित थे।