उत्तराखंड में अनलॉक-2 में कोरोना संक्रमण की स्थिति गंभीर रही। अनलॉक-1 की तुलना में सैंपलिंग जांच बढ़ने के साथ ही कोरोना मामलों में तेजी से बढ़ोत्तरी हुई है। वहीं, रिकवरी दर घटी है।
शुक्रवार को अनलॉक-दो की समय सीमा पूरी हो गई। एक जुलाई से शुरू हुए अनलॉक-2 में अनलॉक-एक की तुलना में सैंपल जांच में 157 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई है। अनलॉक-2 में 95947 सैंपल की जांच की गई। जिनमें 4302 कोरोना संक्रमित मिले हैं। वहीं, अनलॉक-1 (1 से 30 जून) तक प्रदेश में 37291 सैंपल टेस्ट और 1975 संक्रमित मिले थे। अनलॉक-1 की तुलना में रिकवरी दर में 9 प्रतिशत की कमी आई है। अनलॉक-2 में 1937 मरीज ठीक हुए हैं।
कोरोना आंकड़ों का अध्ययन कर रहे सोशल डेवलपमेंट फॉर कम्युनिटी फाउंडेेशन के संस्थापक अनूप नौटियाल ने स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के आधार पर अनलॉक-1 और अनलॉक-2 में कोरोना संक्रमण की तुलना रिपोर्ट तैयार की है। नौटियाल का कहना है कि अनलॉक-2 में सैंपल जांच में 157 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। वहीं, जांच बढ़ने के साथ ही संक्रमित मामले बढ़े हैं और रिकवरी दर पहले की तुलना में घटी है।
राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की संस्तुति के तहत प्रदेश सरकार ने दस वर्ष से कम की सजा भुगत रहे 12 कैदियों को रिहा करने का आदेश जारी किया है। गृह विभाग की ओर से जारी आदेेेश के मुताबिक जिला कारागार देहरादून से दो, जिला जेल हरिद्वार से एक, जिला जेल अल्मोड़ा से चार, नैनीताल और हल्द्वानी से एक-एक, उप कारागार रुड़की से तीन कैदियों को रिहा किया जाएगा। इन कैदियों में कोई भी कैदी ऐसा नहीं है जिसकी चार माह से अधिक की सजा शेष हो।
कोविड-19 को देखते हुए मार्च माह में सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों से कहा था कि जेलों मे कैदियों की संख्या को कम किया जाए। इसके लिए राज्य स्तर पर कमेटी बनाई जाए। इसी के तहत राज्य विधिक प्राधिकरण के आदेश पर इन बंदियों को रिहा किया गया है। इस मामले को लेकर कई संस्थाओं ने कम संख्या में कैदियों को रिहा किए जाने का मामला भी उठाया था। कई राज्यों ने कई कई हजार कैदियों को रिहा भी किया।