उत्तराखंड में पहला कोरोना संक्रमित मरीज मिलने के बाद महामारी को छह माह का समय पूरा हो गया है। इस दौरान प्रदेश की सवा करोड़ आबादी पर पांच लाख लोगों की जांच हो पाई है। मैदानी जिलों की आबादी अधिक होने के साथ कोरोना मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ने के बाद भी प्रति लाख आबादी पर जांच कम है। वहीं पहाड़ों में कम आबादी के बाद भी प्रति लाख पर जांच अधिक है।
प्रदेश के देहरादून, हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर और नैनीताल जिले की आबादी नौ पर्वतीय जिलों से अधिक है। चार जिलों में अब तक कुल जांच के 55 प्रतिशत टेस्ट हुए हैं। जबकि कोरोना मरीज 76 प्रतिशत मिले हैं। वहीं नौ पर्वतीय जिलों में 45 प्रतिशत टेस्ट और 24 प्रतिशत कोरोना संक्रमित मामले मिले हैं। उत्तरकाशी जिले में प्रति लाख आबादी पर सबसे अधिक 9270 लोगों की जांच हो रही है। जबकि चार मैदानी जिलों में प्रति लाख आबादी पर 3500 से 4000 टेस्ट हो रहे हैं। प्रदेश में सबसे अधिक कोरोना मरीज मैदानी जिलों में मिल रहे हैं।
स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट का विश्लेषण कर रहे सोशल डेवलपमेंट फॉर कम्युनिटी फाउंडेशन के संस्थापक अनूप नौटियाल का कहना है कि पर्वतीय जिलों की तुलना में चार मैदानी जिलों की आबादी अधिक होने के बावजूद भी प्रति लाख पर टेस्ट काफी कम है।