महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्य ने सोमवार को सचिवालय में मुख्यमंत्री वात्सल्य योजना की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए कि कोविड में अनाथ हुए सभी बच्चों को जल्द योजना का लाभ मिले। विभागीय मंत्री ने संबंधित सभी विभागों को इस योजना से संबंधित शासनादेश जारी करने के निर्देश दिए।
मंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार की ओर से कोविड में अनाथ हुए बच्चों के लिए इस योजना की शुरुआत की है। योजना के तहत एक मार्च 2020 से 31 मार्च 2022 तक कोरोना एवं अन्य बीमारियों से माता-पिता, संरक्षक या माता-पिता में से किसी एक की मौत पर प्रभावित बच्चों की देखरेख की जाएगी। जन्म से 21 साल तक के बच्चों की देखभाल, पुनर्वास, चल अचल संपत्ति, उत्तराधिकारों एवं विधिक अधिकारों का संरक्षण किया जाएगा। विभागीय मंत्री ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता है कि कोविड से अनाथ हुए बच्चों को शीघ्र योजना का लाभ मिले।
मंत्री ने प्रभावित बच्चों को मुफ्त शिक्षा, स्वास्थ्य, खाद्यान्न, अनाथ बच्चों को नौकरी में पांच फीसदी आरक्षण का लाभ देने के लिए संबंधित अधिकारियों को तेजी से कार्य करने के निर्देश दिए। मंत्री ने कहा कि वैसे तो कोरोनाकाल में बच्चों के माता-पिता व संरक्षक के चले जाने की भरपाई करना संभव नहीं है। फिर भी सरकार की ओर से इन बच्चों को अभिभावक की तरह संरक्षण दिया जाएगा।
मुख्य सचिव डा. एसएस संधू ने संबंधित विभागों के अधिकारियों को इसके लिए गाइडलाइन एवं जीओ जारी करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि कैबिनेट के निर्णयों का शीघ्र पालन किया जाए। मुख्य सचिव ने कहा कि चिन्हित किए गए बच्चों के सत्यापन का काम भी जल्द पूरा किया जाए। वहीं जिन बच्चों का सत्यापन का काम पूरा हो चुका है, उन्हें जल्द योजना का लाभ दिया जाए। बैठक में सचिव अरविंद सिंह ह्यांकी, सचिव हरि चंद्र सेमवाल आदि मौजूद रहे।
कोविड कर्फ्यू में मिली छूट के बाद भी देहरादून की नाइट लाइफ अभी बहाल नहीं हो पाई है। दरअसल छूट तो मिली, लेकिन शर्तों के साथ। ऐसे में पब और रेस्टोरेंट में आने वाले लोगों की संख्या पहले के मुकाबले न के बराबर है।
कोविड से पहले आमतौर पर राजपुर रोड, चकराता रोड आदि जगहों पर रेस्टोरेंट और पब आदि रात 12 बजे तक खुलते थे। पाबंदी उस वक्त भी थी, लेकिन ज्यादा सख्ती नहीं थी। देर रात तक सड़कों पर चहल-पहल रहती थी। देर रात डीजे के पर मस्ती तो नहीं कर सकते थे, लेकिन खाना-पीना हो जाता था। देर रात आइसक्रीम पार्लर भी खुलते थे। पिछले साल पांच महीनों की बंदी के बाद धीरे-धीरे नाइट लाइफ बहाल होने लगी थी, लेकिन अप्रैल में कोविड कर्फ्यू ने फिर से ब्रेक लगा दिया।
डेढ़ माह पहले रेस्टोरेंट और बार के खुलने की अनुमति मिली, लेकिन रात में समय 10 बजे तक ही है। राजपुर रोड पर बार और रेस्टोरेंट चलाने वाले अंकित बताते हैं कि उनके यहां पहले रात में काफी भीड़ रहती थी। अब छूट मिली है, लेकिन पूरे सप्ताह भीड़ देखने को नहीं मिलती। वीकेंड का इंतजार करना पड़ता है। इस दौरान ही कुछ लोग आ जाते हैं। संचालक गितेश कुमार ने बताया कि मंगलवार को पूरा दिन खाली रहा। रात हुई दो-चार लोग आए। गाइडलाइन के तहत रात में आठ बजे तक ही एंट्री दी जाती है।
मैगी प्वाइंट भी बंद
मसूरी रोड पर मैगी प्वाइंट में दिन से लेकर रात तक भीड़ लगी रहती थी। बीते चार महीनों से यहां इक्का-दुक्का दुकानें ही खुलती हैं। पहले देर रात तक यहां लोग नूडल्स खाने और मौज मस्ती के लिए जाते थे, लेकिन अब यहां पर सारी गतिविधियां बंद हैं।