कोरोना संक्रमण का खतरा एक बार फिर बढ़ रहा है। प्रदेश में संक्रमितों की बढ़ती संख्या इसकी तस्दीक करती है। लेकिन इसके उलट कोविड सैंपल जांच की रफ्तार कम हो रही है। प्रदेश में प्रतिदिन औसतन आठ हजार सैंपलों की जांच की जा रही है। हाल यह है कि साढ़े नौ महीनों में बीते सप्ताह में सबसे कम सैंपलिंग हुई है।
प्रदेश में कोरोना काल को 623 दिन का समय बीत गया है। कोविड महामारी की दूसरी लहर के बाद प्रदेश में संक्रमितों की संख्या कम होती जा रही थी, लेकिन बीते कुछ दिन से फिर से संक्रमण बढ़ता जा रहा है। ऐसे में जहां कोविड जांच बढ़नी चाहिए थी, वहीं यह कम होती जा रही है।
दूसरी तरफ बढ़ती लापरवाही कोरोना के फैलाव की आशंका को और बढ़ा रही है। दरअसल, बीते दिनों प्रदेश सरकार ने अपनी तरफ से लगाई गईं कोरोना संबंधी सभी बंदिशें हटा दी थीं। मौजूदा हाल यह हैं कि अधिकतर लोग सार्वजनिक स्थानों पर भी मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग तक के नियम का पालन नहीं कर रहे हैं।
कोविड संक्रमण फिर बढ़ रहा है। फरवरी 2021 के बाद प्रदेश में एक सप्ताह में सबसे कम कोविड सैंपलों की टेस्टिंग की गई। संक्रमण की रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग को सैंपल जांच बढ़ानी होगी। साथ ही लोगों को कोविड के अनुरूप व्यवहार को फिर अपनाना होगा।
- अनूप नौटियाल, अध्यक्ष, सोशल डेवलपमेंट फॉर कम्युनिटी फाउंडेशन
कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए जिले का स्वास्थ्य विभाग भी अलर्ट हो गया है। राजकीय दून मेडिकल अस्पताल समेत विभिन्न सरकारी अस्पतालों को इसे लेकर अलर्ट कर दिया गया है। कोरोना की पहली और दूसरी लहर में जिले में सबसे पहले राजकीय दून मेडिकल अस्पताल में ही कोरोना संक्रमित मरीजों को भर्ती किया गया था। बाद में लंबे समय के लिए दून अस्पताल को पूरी तरह से कोविड अस्पताल के रूप में तब्दील कर दिया गया था।
इसके अलावा रायपुर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम में भी पहले कोविड केयर सेंटर और दूसरी लहर में इसे कोविड अस्पताल के रूप में तब्दील कर दिया गया था। कोरोना के नए स्वरूप की आहट और बढ़ते मामलों को देखते हुए दून अस्पताल में जहां कोविड वार्डों को आरिक्षत किया जा रहा है।
वहीं, रायपुर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम में अतिरिक्त डॉक्टरों, पैरामेडिकल और अन्य स्टाफ की तैनाती की जा रही है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. मनोज उप्रेती ने बताया कि सभी अस्पतालों को अलर्ट कर दिया गया है। साथ ही डॉ. उप्रेती ने लोगों से अपील की है कि कोरोना गाइडलान का पूरी तरह से पालन करें। कोरोना का खतरा अभी टला नहीं है। ऐसे में थोड़ी भी लापरवाही बड़े खतरे को आमंत्रण दे सकती है।
इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी में प्रशिक्षण लेने आए बिहार, झारखंड, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, गुजरात जैसे राज्यों के कोरोना संक्रमित आईएफएस अधिकारियों को मंगलवार को उनके मूल कैडर वाले राज्यों को भेज दिया जाएगा। जिलाधिकारी डॉ. आर राजेश कुमार के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की अगुवाई में टीम ने रविवार को अकादमी में जाकर कोरोना संक्रमित आईएफएस अधिकारियों के स्वास्थ्य का परीक्षण किया। एकेडमी के एडिशनल डायरेक्टर एसके अवस्थी ने बताया कि फिलहाल सभी अधिकारी पूरी तरह स्वस्थ हैं और उन्हें किसी भी प्रकार की दिक्कत नहीं है।
लिहाजा उनके बेहतर स्वास्थ्य को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग की टीम ने सभी अधिकारियों को 12 मंगलवार तक उनके मूल कैडर वाले राज्यों में भेजने की इजाजत दे दी है। एडीशनल डायरेक्टर एसके अवस्थी के मुताबिक सभी आईएफएस अधिकारियों को मंगलवार को उनके मूल कैडर वाले राज्यों को भेज दिया जाएगा।
बता दें कि इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी में देश के सभी राज्यों के 48 आईएफएस अधिकारी मिड टर्म प्रशिक्षण के लिए आए थे। इन अधिकारियों को आईआईएम लखनऊ और नईदिल्ली में प्रशिक्षण के लिए भेजा गया था। लेकिन जब नईदिल्ली में अधिकारियों का कोरोना टेस्ट कराया गया तो 11 अधिकारी कोरोना संक्रमित पाए गए थे। जिसमें से तीन कोरोना संक्रमित अधिकारी तो नईदिल्ली से ही अपनी मूल कैडर वाले वाले राज्यों में भेज दिए गए थे। जबकि आठ अधिकारियों को देहरादून भेजकर अकादमी में क्वारेंटीन कर दिया गया था।