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उत्तराखंड: पूर्व सीएम तीरथ सिंह रावत कोरोना संक्रमित, बीते 24 घंटे में मिले 2682 नए मरीज, पांच लोगों में ओमिक्रॉन की पुष्टि

Sun, 16 Jan 2022 06:20 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून

सार

प्रदेश की रिकवरी दर 91.33 प्रतिशत और सैंपल जांच के आधार पर संक्रमण दर 13.71 प्रतिशत पहुंच गई है।
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तीरथ सिंह रावत - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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उत्तराखंड में रविवार को राज्य में 2682 नए मामले सामने आए हैं। वहीं कोई मौत नहीं हुई है। पूर्व मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत रविवार को कोरोना संक्रमित पाए गए हैं। उन्होंने खुद को आइसोलेट कर लिया है। अब तक कुल 7440 मरीजों की मौतें हो चुकी है। पिछले 24 घंटे में 328 मरीज स्वस्थ हुए हैं। इन्हें मिलाकर 337865 मरीजों ने संक्रमण को मात दी है। वर्तमान में 17223 सक्रिय मरीजों का इलाज चल रहा है। प्रदेश की रिकवरी दर 91.33 प्रतिशत और सैंपल जांच के आधार पर संक्रमण दर 13.71 प्रतिशत पहुंच गई है।
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उधम सिंह नगर में पांच लोगों में ओमिक्रॉन वैरिएंट की पुष्टि हुई है। सभी लोग स्वस्थ हैं। होम आइसोलेशन की अवधि पूरी कर चुके हैं। सीएमओ डॉ. सुनीता चुफाल रतूड़ी ने कहा कि सभी लोग स्वस्थ हैं। इनमें चार रुद्रपुर और एक सितारगंज के निवासी हैं। 

देहरादून जिले में सबसे ज्यादा 1331 संक्रमित मिले हैं। नैनीताल में 188, हरिद्वार में 351, ऊधमसिंह नगर में 281, चंपावत में 00, पौड़ी में 159, अल्मोड़ा में 74, टिहरी में 79, पिथौरागढ़ में 69, बागेश्वर में 71, चमोली में 35, रुद्रप्रयाग में 13 और उत्तरकाशी जिले में 31 संक्रमित मिले हैं
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उत्तराखंड: प्रदेश में कोरोना के कहर के बीच सोमवार से नहीं खुलेंगे स्कूल, बढ़ेगी बंद रहने की समयावधि 

नारसन बॉर्डर पर 27 लोग मिले कोरोना पॉजिटिव 
विधानसभा चुनाव के मद्देनजर नारसन बॉर्डर पर पुलिस की ओर से सख्ती बढ़ा दी गई है। पुलिस ने बॉर्डर से गुजरने वाले सभी वाहनों की सख्ती से चेकिंग की। साथ ही वाहनों की गहनता से तलाशी ली। साथ ही कोरोना जांच के बाद ही प्रवेश दिया जा रहा है। वहीं दूसरी ओर मकर संक्रांति के स्नान के दौरान स्वास्थ्य विभाग की ओर से कोरोना जांच के लिए सात काउंटर सुचारु किए गए हैं जो शिफ्टों में यात्रियों की जांच कर रहे हैं। 

विधानसभा चुनाव की तिथि घोषित होने के बाद ही पुलिस ने बॉर्डरों पर सुरक्षा बढ़ा दी है। वहीं 14 जनवरी को मकर संक्रांति के पर्व से एक दिन पहले एक प्राइवेट कंपनी की ओर से कोरोना जांच के लिए सात काउंटरों का संचालन शुरू कर दिया गया है। इससे पहले तक एक काउंटर पर ही जांच हो रही थी। अब सात काउंटरों पर हर समय 14 कर्मचारियों की तैनाती है। एक दिन में चार शिफ्टों में कर्मचारियों की अदला बदली की जा रही है ताकि सभी यात्रियों की आसानी से कोरोना जांच की जा सके। वहीं, पुलिस बॉर्डर पर बाहरी राज्यों से आने वाले वाहनों की गहनता से तलाशी कर रही है।

रविवार को नारसन बॉर्डर पर बड़ी संख्या में पुलिस ने सड़क पर उतरकर वाहनों की तलाशी ली। रविवार को लगभग 2845 लोगो की जांच की गई। जांच में 27 लोग पॉजिटिव पाए। उन्हें होम आइसोलेट कर दिया गया है। इस दौरान चौकी प्रभारी बृजपाल सिंह समेत आदि मौजूद रहे। उधर, सीओ पंकज गैरोला ने बताया कि बॉर्डर पर सभी वाहनों की सघन चेकिंग की जा रही है।
 

उत्तराखंड में 55 प्रतिशत किशोरों को संक्रमण से सुरक्षा कवच

उत्तराखंड में दो सप्ताह में 15 से 18 साल तक के किशोरों को कोरोना संक्रमण से सुरक्षा कवच मिला है। वहीं, 71 हजार से अधिक स्वास्थ्य कर्मियों, फ्रंटलाइन वर्करों और 60 वर्ष से ऊपर के बुजुर्गों को एहतियाती डोज लगाई जा चुकी है। प्रदेश को एक साल के भीतर केंद्र से 1.62 करोड़ से अधिक कोविड वैक्सीन मिली है। वर्तमान में टीकाकरण के लिए राज्य के पास पर्याप्त वैक्सीन उपलब्ध है। 

प्रदेश में 16 जनवरी 2021 को कोविड टीकाकरण अभियान शुरू हुआ था। शुरुआत में सबसे पहले स्वास्थ्य कर्मियों और फ्रंट लाइन वर्करों को वैक्सीन लगाई गई। एक साल के भीतर प्रदेश में 120558 (99.9 प्रतिशत) स्वास्थ्य कर्मियों को पहली और 116025 (96.5 प्रतिशत) को दूसरी डोज लगाई जा चुकी है।

वहीं, 188020 (99.2 प्रतिशत) फ्रंटलाइन वर्करों को पहली और 181528 (96.5 प्रतिशत) को दूसरी डोज लगाई गई। इसके अलावा 18 वर्ष से अधिक आयु वर्ग में लक्ष्य के सापेक्ष शत प्रतिशत लोगों को पहली डोज लग चुकी है। जबकि 82 प्रतिशत को अब तक दूसरी डोज लगाई गई है। तीन जनवरी से 15 से 18 वर्ष के किशोरों का टीकाकरण शुरू हुआ है। जिसमें दो सप्ताह के भीतर कुल 6.28 लाख किशोरों में से  342413 को पहली डोज लगाई है। 

राज्य प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. कुलदीप मर्तोलिया ने बताया कि प्रदेश में टीकाकरण सुचारु रूप से चल रहा है। प्रतिदिन से 800 से 1000 बूथों पर कोविड वैक्सीन लगाई जा रही है। प्रदेश में वैक्सीन की कोई कमी नहीं है। एक साल में केंद्र ने 1.62 करोड़ से अधिक वैक्सीन दी गई। 

जिला     -       15 से 18 आयु वर्ग    -  एहतियाती डोज
अल्मोड़ा     -       22354     -          4464    
बागेश्वर      -       13082       -        3066
चमोली       -       13972      -         3390
चंपावत     -         9160         -       1806
देहरादून     -        64110     -          17140
हरिद्वार        -      48534       -        11070
नैनीताल      -       36635       -        7871
पौड़ी           -      23822      -        4095
पिथौरागढ़    -        17607     -         4276
रुद्रप्रयाग      -       8713         -       1170
टिहरी           -     23205       -        3537
ऊधमसिंह नगर   -   49923    -           5532
उत्तरकाशी   -        11286      -         3628
कुल           -     342413        -      71045
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मनमाना शुल्क वसूलने वाले अस्पतालों के इलाज पर रोक

कोरोना संक्रमण के बीच मरीजों-तीमारदारों से मनमाने तरीके से इलाज खर्च वसूलने वाले कई अस्पतालों पर स्वास्थ्य विभाग ने शिकंजा कस दिया है। सीएमओ ने ऐसे कई अस्पतालों पर कोरोना संक्रमित मरीजों के इलाज पर रोक लगा दी है। 

मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. उप्रेती का कहना है कि जिन निजी अस्पतालों में कोरोना संक्रमित मरीजों के इलाज पर रोक लगाई गई है अगर वे मरीजों का इलाज करते या फिर दोबारा मनमाना तरीके से इलाज खर्च करते पाए गए तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी। 
 
कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर में मरीजों का आंकड़ा तेजी से बढ़ने पर राजधानी के तमाम बड़े छोटे निजी अस्पतालों को बी कोरोना संक्रमित मरीजों के इलाज करने की अनुमति गई थी। कई निजी अस्पतालों में हजारों की संख्या में मरीजों ने अपना इलाज भी कराया। इस दौरान कई मरीजों और तीमारदारों ने शिकायत दर्ज कराई कि निर्धारित दरों की बजाए मनमाने तरीकों से इलाज खर्च वसूला गया। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने जब अस्पतालों पर शिकंजा कसा तो कुछ अस्पतालों ने मरीजों का पैसा भी लौटाया। जबकि पैसा नहीं लौटाने वाले कई अस्पतालोें के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज कराया गया। 

अब फिर से कोरोना संक्रमण बढ़ने पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. उप्रेती ने संबंधित विवादित अस्पतालों में मरीजों के इलाज पर रोक लगा दी है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी का कहना है कि दून अस्पताल के साथ ही महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स कॉलेज में तैयार किए गए कोविड केयर सेंटर, जिले के तमाम उप जिला अस्पतालों सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में कोरोना संक्रमित मरीजों के इलाज की व्यवस्था है। ऐसे में जिन मरीजों में कोरोना संक्रमण है वे अस्पतालों में भर्ती होकर इलाज कराएं। साथ ही कुछ निजी अस्पतालों में भी मरीजों के इलाज की व्यवस्था की गई है।
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