उत्तराखंड में दो सप्ताह में 15 से 18 साल तक के किशोरों को कोरोना संक्रमण से सुरक्षा कवच मिला है। वहीं, 71 हजार से अधिक स्वास्थ्य कर्मियों, फ्रंटलाइन वर्करों और 60 वर्ष से ऊपर के बुजुर्गों को एहतियाती डोज लगाई जा चुकी है। प्रदेश को एक साल के भीतर केंद्र से 1.62 करोड़ से अधिक कोविड वैक्सीन मिली है। वर्तमान में टीकाकरण के लिए राज्य के पास पर्याप्त वैक्सीन उपलब्ध है।
प्रदेश में 16 जनवरी 2021 को कोविड टीकाकरण अभियान शुरू हुआ था। शुरुआत में सबसे पहले स्वास्थ्य कर्मियों और फ्रंट लाइन वर्करों को वैक्सीन लगाई गई। एक साल के भीतर प्रदेश में 120558 (99.9 प्रतिशत) स्वास्थ्य कर्मियों को पहली और 116025 (96.5 प्रतिशत) को दूसरी डोज लगाई जा चुकी है।
वहीं, 188020 (99.2 प्रतिशत) फ्रंटलाइन वर्करों को पहली और 181528 (96.5 प्रतिशत) को दूसरी डोज लगाई गई। इसके अलावा 18 वर्ष से अधिक आयु वर्ग में लक्ष्य के सापेक्ष शत प्रतिशत लोगों को पहली डोज लग चुकी है। जबकि 82 प्रतिशत को अब तक दूसरी डोज लगाई गई है। तीन जनवरी से 15 से 18 वर्ष के किशोरों का टीकाकरण शुरू हुआ है। जिसमें दो सप्ताह के भीतर कुल 6.28 लाख किशोरों में से 342413 को पहली डोज लगाई है।
राज्य प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. कुलदीप मर्तोलिया ने बताया कि प्रदेश में टीकाकरण सुचारु रूप से चल रहा है। प्रतिदिन से 800 से 1000 बूथों पर कोविड वैक्सीन लगाई जा रही है। प्रदेश में वैक्सीन की कोई कमी नहीं है। एक साल में केंद्र ने 1.62 करोड़ से अधिक वैक्सीन दी गई।
जिला - 15 से 18 आयु वर्ग - एहतियाती डोज
अल्मोड़ा - 22354 - 4464
बागेश्वर - 13082 - 3066
चमोली - 13972 - 3390
चंपावत - 9160 - 1806
देहरादून - 64110 - 17140
हरिद्वार - 48534 - 11070
नैनीताल - 36635 - 7871
पौड़ी - 23822 - 4095
पिथौरागढ़ - 17607 - 4276
रुद्रप्रयाग - 8713 - 1170
टिहरी - 23205 - 3537
ऊधमसिंह नगर - 49923 - 5532
उत्तरकाशी - 11286 - 3628
कुल - 342413 - 71045
कोरोना संक्रमण के बीच मरीजों-तीमारदारों से मनमाने तरीके से इलाज खर्च वसूलने वाले कई अस्पतालों पर स्वास्थ्य विभाग ने शिकंजा कस दिया है। सीएमओ ने ऐसे कई अस्पतालों पर कोरोना संक्रमित मरीजों के इलाज पर रोक लगा दी है।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. उप्रेती का कहना है कि जिन निजी अस्पतालों में कोरोना संक्रमित मरीजों के इलाज पर रोक लगाई गई है अगर वे मरीजों का इलाज करते या फिर दोबारा मनमाना तरीके से इलाज खर्च करते पाए गए तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर में मरीजों का आंकड़ा तेजी से बढ़ने पर राजधानी के तमाम बड़े छोटे निजी अस्पतालों को बी कोरोना संक्रमित मरीजों के इलाज करने की अनुमति गई थी। कई निजी अस्पतालों में हजारों की संख्या में मरीजों ने अपना इलाज भी कराया। इस दौरान कई मरीजों और तीमारदारों ने शिकायत दर्ज कराई कि निर्धारित दरों की बजाए मनमाने तरीकों से इलाज खर्च वसूला गया। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने जब अस्पतालों पर शिकंजा कसा तो कुछ अस्पतालों ने मरीजों का पैसा भी लौटाया। जबकि पैसा नहीं लौटाने वाले कई अस्पतालोें के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज कराया गया।
अब फिर से कोरोना संक्रमण बढ़ने पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. उप्रेती ने संबंधित विवादित अस्पतालों में मरीजों के इलाज पर रोक लगा दी है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी का कहना है कि दून अस्पताल के साथ ही महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स कॉलेज में तैयार किए गए कोविड केयर सेंटर, जिले के तमाम उप जिला अस्पतालों सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में कोरोना संक्रमित मरीजों के इलाज की व्यवस्था है। ऐसे में जिन मरीजों में कोरोना संक्रमण है वे अस्पतालों में भर्ती होकर इलाज कराएं। साथ ही कुछ निजी अस्पतालों में भी मरीजों के इलाज की व्यवस्था की गई है।