कर्मचारी संगठनों का कहना है कि उनको हड़ताल करने का कोई शौक नहीं है। हड़ताल के लिए कर्मचारियों को मजबूर किया जाता है। लंबे समय तक उनकी समस्याओं का समाधान नहीं होता।
कर्मचारी एकता मंच के अध्यक्ष रमेश चंद्र पांडे के मुताबिक इसी को देखते हुए हड़ताल के प्रति अधिकारियों की जवाबदेही का मुद्दा उठाया गया था। इसके बाद शासन की ओर से विभागाध्यक्षों को नियमित रूप से कर्मचारी संगठनों से बात करने को कहा गया था, लेकिन इस आदेश का भी पालन नहीं हो रहा है।
कोरोना संक्रमण के लगातार बढ़ रहे मामलों को देखते हुए बिजली, पेयजल और स्वास्थ्य से संबंधित विभागों में हड़ताल पर प्रतिबंध लगाने का फैसला किया जा रहा है। यह तीनों ही सेक्टर बेहद महत्वपूर्ण हैं। कोविड के इस दौर में प्रत्येक को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी।
- सुबोध उनियाल, शासकीय प्रवक्ता