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उत्तराखंड में कोरोना: 24 घंटे में मिले 158 नए संक्रमित, चार की मौत, 187 मरीज हुए ठीक

Sat, 03 Jul 2021 10:44 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून

सार

उत्तराखंड में कोरोना संक्रमण और मौत के मामलों में कमी आई है। प्रदेश में संक्रमित मरीजों का रिकवरी रेट 95.57 फीसदी है।
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कोरोना वायरस की जांच (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : PTI
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विस्तार
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उत्तराखंड में पिछले 24 घंटे में कोरोना संक्रमण के 158 नए मामले सामने आए हैं। वहीं चार मरीजों की मौत हुई है। इसके अलावा आज 187 मरीजों को ठीक होने के बाद घर भेजा गया। वहीं, सक्रिय मामलों की संख्या घटकर 1821 पहुंच गई है। 

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टीका ही बचाएगा अभियान : कोविड वैक्सीन लगवाने में युवाओं में खासा उत्साह

स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी बुलेटिन के अनुसार, शनिवार को 23653 सैंपलों की जांच रिपोर्ट निगेटिव आई है। वहीं, अल्मोड़ा में चार, बागेश्वर में एक, चमोली में एक, चंपावत में तीन, देहरादून में 80, हरिद्वार में 11, नैनीताल में छह, पौड़ी में पांच, पिथौरागढ़ में 14, रुद्रप्रयाग में तीन, टिहरी में आठ, ऊधमसिंह नगर में एक और उत्तरकाशी में 21 मामले सामने आए हैं। 
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प्रदेश में अब तक कोरोना के कुल संक्रमितों की संख्या तीन लाख 40 हजार 646 हो गई है। इनमें से तीन लाख 25 हजार 548 लोग ठीक हो चुके हैं। प्रदेश में कोरोना के चलते अब तक कुल 7331 लोगों की जान जा चुकी है।

लापरवाही बरती तो खतरनाक होगी तीसरी लहर

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ने कोरोना की तीसरी लहर को लेकर लोगों का सचेत किया है। एम्स के मुताबिक कोविड सुरक्षा नियमों को लेकर लापरवाही डेल्टा प्लस वैरिएंट की तीसरी लहर का कारण बन सकती है। ऐसे में केवल वैक्सीनेशन और कोविड सुरक्षा नियमों का पालन से स्वयं को सुरक्षित रखा जा सकता है।   

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार डेल्टा वैरिएंट अभी तक विश्व के 100 देशों में पाया जा चुका है। डेल्टा वैरिएंट को बी. 1.617.2. स्ट्रेन भी कहते हैं। जबकि ’डेल्टा प्लस’ वेरिएंट बी. 1.617.2.1 है। कोरोना वायरस के स्वरूप में आ रहे बदलावों की वजह से ही डेल्टा वायरस बना है। 

एम्स निदेशक प्रोफेसर रविकांत ने बताया कि कोरोना वायरस के अन्य सभी वैरिएंटों की तुलना में डेल्टा प्लस वैरिएंट की वजह से फेफड़ों में कोविड निमोनिया का संक्रमण अधिक हो सकता है। यह भी संभावना है कि कोरोना वायरस के डेल्टा प्लस वैरिएंट में एंटीबॉडी कॉकटेल’ जैसी दवा का भी शत- प्रतिशत असर नहीं हो पाए। लेकिन वैक्सीन लगा चुके लोगों में इसकी वजह से गंभीर किस्म के संक्रमण का कोई मामला फिलहाल भारत में नहीं मिला है। उन्होंने बताया कि अब तक देश के 12 राज्यों में इसकी पुष्टि हो चुकी है। 

एम्स से भेजे 15 सैंपल, नहीं मिला डेल्टा प्लस 
एम्स निदेशक प्रोफेसर रवि कांत ने बताया कि बीते महीने में एम्स ऋषिकेश ने कोरोना संक्रमितों की रैंडम सैंपलिंग की थी। 15 संक्रमितों के सैंपल डेल्टा प्लस वैरिएंट की जांच के लिए आईसीएमआर भेजे गए थे। लेकिन इनमें से किसी भी सैंपल में डेल्टा प्लस वैरिएंट की पुष्टि नहीं हुई है।   

डेल्टा प्लस वैरिएंट फेफेड़ों के लिए खतरनाक
एम्स के माइक्रोबायोलॉजी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. दीप ज्योति कलिता ने बताया कि कोरोना एक आरएनए वायरस है। आरएनए वायरस की पहचान है कि यह बार-बार म्यूटेशन कर अपना रूप बदलता है। अभी तक कोरोना के अल्फा, बीटा, डेल्टा और  डेल्टा प्लस आदि रूपों की पहचान हो चुकी है। डॉ. कलिता ने बताया कि डेल्टा प्लस वैरिएंट निचली श्वसन प्रणाली में फेफड़ों की म्यूकोसल कोशिकाओं के लिए घातक हो सकता है।
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दो दिन बाद शुरू हुआ टीकाकरण, उमड़ी भीड़ 

हरिद्वार में दो दिन बाद शुरू हुए टीकाकरण को लेकर केंद्रों पर वैक्सीन लगवाने वालों की भीड़ उमड़ पड़ी। हालत यह रही कि कई केंद्रों पर डोज खत्म होने से लोगों को निराश लौटना पड़ा। जिन लोगों को डोज लग गई, वे काफी खुश नजर आए। 

सोमवार को 22500 डोज आने से केंद्रों पर खूब टीकाकरण हुआ था। इससे अधिकांश डोज मंगलवार और बुधवार को ही खत्म हो गई थी। बृहस्पतिवार को बहुत कम सेंटरों पर टीकाकरण किया गया था। इसके कारण केंद्रों पर ताले लटके होने से लोगों को मायूस होकर लौटना पड़ा था। शुक्रवार को 40 हजार डोज मिलने से 115 केंद्रों पर करीब 17 हजार लोगों का टीकाकरण किया गया।

इस दौरान लोगों ने शारीरिक दूरी का पालन नहीं किया। प्रेमनगर आश्रम, ऋषिकुल आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज और इंटर कॉलेज ज्वालापुर में लगाए गए केंद्रों पर काफी संख्या में लोग पहुंचे। इन केंद्रों पर डोज खत्म होने से लोगों को बिना टीके लगवाए वापस लौटना पड़ा। एसीएमओ डॉ. अजय कुमार ने बताया कि कोरोना टीकाकरण की डोज अब आती रहेगी, इसलिए लोगों को चिंता करने वाली बात नहीं है। सभी को टीके लगवाए जाएंगे। 
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