सहकारी समितियों में गड़बड़ियों के संबंध में सचिव सहकारिता की ओर से जांच के आदेश दिए गए हैं। इसके लिए बकायदा आठ अफसरों को जांच का जिम्मा सौंपा गया है। इसमें निबंधक रजिस्ट्रार, सभी अपर निबंधक व उप निबंधक को जांच की जिम्मेदारी सौंपते हुए चालू माह के अंत तक रिपोर्ट देने को कहा गया है।
खास बात है कि प्रदेश में कुल 697 सहकारी समितियों की जांच आठ अफसरों को मात्र 19 दिन में पूरी करनी है। पिछले दिनों जिला सहकारी बैंकों में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के चार सौ से अधिक पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी की शिकायत मिलने के बाद इसकी जांच जारी है। इसी क्रम में सहकारिता मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने सहकारी समितियों में अन्य गड़बड़ियों से संबंधित शिकायतों की जांच के आदेश दिए थे।
यह शिकायतें ऋण वसूली, समितियों में कामकाज की पारदर्शिता, पैक्स कंप्यूटराइजेशन, नाबार्ड की ओर से मल्टी सर्विस सेंटर योजना के अंतर्गत चयनित 102 सहकारी समितियों की प्रोजेक्ट रिपोर्ट की स्थिति, ऋण की वसूली से संबंधित थी। सहकारिता सचिव बीवीआरसी पुरुषोत्तम ने अब रजिस्ट्रार आलोक कुमार को दून और ऊधमसिंह नगर, अपर निबंधक ईरा उप्रेती को नैनीताल व ऊधमसिंह नगर, आनंद शुक्ल को पौड़ी, उपनिबंधक नीरज बेलवाल को रुद्रप्रयाग और चमोली, एमपी त्रिपाठी को पिथौरागढ़ व चंपावत, रमिद्री मंद्रवाल को देहरादून व टिहरी, मान सैनी को अल्मोड़ा व बागेश्वर, अनिल कुमार को हरिद्वार व उत्तरकाशी की सहकारी समितियों की जांच सौंपी है।
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सचिव सहकारिता बीवीआरसी पुरुषोत्तम ने बताया कि सभी जांच अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वह आवंटित जिलों की समितियों की जांच तय समय में पूरा कर रिपोर्ट 30 मई तक शासन को सौंपे। उन्होंने सभी अधिकारियों से मौके पर जाकर स्थलीय निरीक्षण करने के भी आदेश दिए हैं। बताते चलें कि प्रदेश में वर्तमान में कुल 697 सहकारी समितियां काम कर रही हैं। ऐसे में इतनी समितियों की जांच 19 दिन में मात्र आठ अफसर किस प्रकार करेंगे, इस पर भी सवाल उठ रहे हैं।