हाईकोर्ट में याचिका खारिज होने के बाद उत्तराखंड में संविदा या अस्थायी तौर पर पांच साल से काम कर रहे करीब 40 हजार कर्मचारियों के नियमितीकरण का रास्ता साफ हो गया है।
इस बाबत प्रदेश सरकार का रुख सकारात्मक है। उम्मीद है कि दीपावली से पहले ही कर्मचारियों के यहां खुशी के चिराग रोशन हो जाएंगे।
राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद को मुख्य सचिव सुभाष कुमार ने आश्वासन दिया है कि हाईकोर्ट के निर्णय की कॉपी मिलते ही तीन-चार दिन में इस संबंध में काम शुरू हो जाएगा।
121 विभागों के कर्मचारियों में खुशी की लहर
नियमितीकरण की आस जगने से 121 विभागों के कर्मचारियों में खुशी की लहर है। संयुक्त परिषद इस संबंध में पहले से मांग कर रही थी। परिषद ने इस संबंध में मुख्यमंत्री से भी बात की है।
परिषद के प्रदेश अध्यक्ष ठाकुर प्रहलाद सिंह ने बताया कि नियमितीकरण के संबंध में हर विभाग में कमेटी गठित होगी। सितंबर-अक्तूबर में नियमितीकरण का कार्य पूरा होने की उम्मीद है।
परिषद कर्मचारियों का आंकड़ा भी तैयार कर रही है। इस संबंध में कर्मचारी संगठनों का प्रतिनिधिमंडल सोमवार को मुख्य सचिव से फिर मिलेगा।
इन विभागों में होना है नियमितीकरण
स्वास्थ्य विभाग-6000, सिंचाई विभाग-5000, पीडब्लूडी-6000, पुलिस-600, रजिस्ट्रार आफिस-200, व्यापार कर-300, सिंचाई विभाग-1700, परिवहन-250, ग्रामीण अभियंत्रण-250, गन्ना-155, मत्स्य-150, मंडी-250, पॉलीटेक्निक-250, आईटीआई-250, वन-800, वित्त-550, शिक्षा विभाग-3000, उद्यान-2500, कृषि-2500, सचिवालय-250, विधानसभा-255, आरएफसी-300, ऊर्जा-4000, जलसंस्थान-2500, रोडवेज-2500, आयुर्वेदिक-250, होम्योपैथी-200, वेटेनरी-200, वित्त-लेखा-150, वित्त विकास निगम-250, विभिन्न आयोग-360
(राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के अनुसार)
कर्मचारी संगठनों की शासन से मांग
- विभागों में नियमितीकरण वरिष्ठता के आधार पर हो
- राजनीतिक सिफारिश पर प्राथमिकता तय न की जाए
- बिचौलियों को बीच में न आने दिया जाए
- आरक्षित कोटा वालों को भी नियमानुसार लाभ मिले
- योग्यता के अनुसार कार्य हो