पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि पार्टी को बीते विधानसभा चुनाव में भले ही अपेक्षित परिणाम नहीं मिल पाए हैं, लेकिन पार्टी के वोट प्रतिशत में किसी तरह की कमी नहीं आई है। उल्टा पार्टी को इस बार चार से पांच प्रतिशत अधिक वोट मिले हैं। पार्टी 11 सीटों से 19 पर पहुंची है।
ऐसे में केंद्रीय राजनीति में यदि पार्टी की भलाई के लिए कोई बड़े फैसले लिए जा रहे हैं, उसमें उत्तराखंड को भी दायित्व दिया जाना चाहिए था। पार्टी प्रदेश अध्यक्ष करन मेहरा का कहना है कि उदयपुर में चिंतन शिविर में मंथन के बाद ही सोच समझकर पार्टी हाईकमान के स्तर पर पार्टी हित में यह फैसला लिया गया है।
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प्रदेश की राजनीति में मिथक को तोड़ते हुए भाजपा लगातार दूसरी बार सत्ता में काबिज हुई है। असंतोषी कांग्रेसी नेताओं की मानें तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का उत्तराखंड लगाव उन्हें यहां के लोगों के करीब लाता है। उन्होंने पार्टी नेताओं को ही नहीं नौकरशाह को तक केंद्र में तवज्जो दी है। जबकि सोनिया गांधी पिछली बार उत्तराखंड कब आईं थीं, यह खुद कांग्रेस के नेताओं को भी याद नहीं है। असंतोषी नेताओं को सोनिया गांधी की उत्तराखंड के प्रति ये अनदेखी भी अखरती है।