हल्द्वानी में हो रहा कांग्रेस का मंथन तीन शब्दों की धुरी पर हुआ है। बात उपेक्षा से शुरू हुई, तो उलाहना तक पहुंची। ‘भरे हुए’ कांग्रेसियों को उम्मीद बंधाई गई कि बेहतर होगा।
मंथन आयोजन से जुड़े लोगों के अनुसार अपेक्षा से ज्यादा कांग्रेसियों का पहुंचना अपने आप में पार्टी के प्रति निष्ठा को दिखाता है, वह यहां से नई ऊर्जा के साथ अपने क्षेत्रों में रवाना हुए हैं।
कांग्रेस के मंथन शिविर में आगामी चुनाव, पार्टी को और मजबूत करने आदि बिंदुओं पर एजेंडा तय किया गया था पर दूसरी पार्टी से टक्कर देने से पहले घर को मजबूत करने की सलाह कई कार्यकर्ताओं ने दी।
सबसे ज्यादा कांग्रेसियों को टीस महत्व नहीं दिए जाने की थी। उन्होंने उपेक्षा को लेकर जमकर तीर भी चलाए गए। खुलकर और बातों-बातों में खूब उलाहना भी दी गई। इसे कांग्रेस आयोजक बेहतर संकेत मान रहे हैं।
जिला अध्यक्ष सतीश नैनवाल का कहना है कि हमने करीब छह सौ लोगों को आमंत्रित किया था पर इसमें करीब तीन हजार कांग्रेसी पहुंचे। मंथन से कार्यकर्ताओं को नई ऊर्जा मिली है, अब ऐसे कार्यक्रम जिला स्तर पर होंगे। इसमें पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारी भी पहुंचेंगे।
शिकायतें...
- पार्टी में उपेक्षा, विधायक बनने के बाद बूथ एजेंट, कार्यकर्ता किनारे हो जाते हैं।
- खास गुटों को ही महत्व दिया जाता है।
- मंत्री और अफसर बात नहीं सुनते।
सुझाव और रणनीति...
- एनएसयूआई, यूथ कांग्रेस में चुनाव की व्यवस्था बंद हो।
- इन संगठनों में पहले की तरह मनोनयन होना चाहिए।
- मोदी फोबिया से बाहर निकलें।
- काले धन के मुद्दे पर मोदी-बाबा रामदेव पर हमला बोलें।