उपनल (उत्तराखंड पूर्व सैनिक कल्याण निगम) के जरिये सरकारी महकमों के रिक्त पदों की भर्तियों में सियासत और सिफारिश के खेल पर अरसे से सवाल उठते रहे हैं।
चहेतों को रोजगार दिलाने जैसे आरोप निगम पर आम हैं। सिफारिशी रोजगार दिलवाने में कई मंत्रियों के साथ अधिकांश विधायक भी सक्रिय हैं। इससे पूर्व सैनिकों व उनके आश्रितों के रोजगार मिलने की संभावना क्षीण होती जा रही है।
उपनल की कार्यप्रणाली में राजनीति का सीधा दखल सैनिक कल्याण मंत्री हरक सिंह के चेयरमैन बनने से हो गया था। लाभ के पद को लेकर मचे बवाल के बाद हरक ने भले पद छोड़ दिया, लेकिन इससे साफ हो गया कि रोजगार देने वाला उपनल राजनेताओं की पहली पसंद है।
निगम का मानना है कि अगर वह मुख्य नियोक्ता की मांग अनुरूप अभ्यर्थी प्रायोजित नहीं किये जाएंगे तो प्रदेश में अन्य सरकारी या गैरसरकारी आउटसोर्सिंग एजेंसियों के माध्यम से नियुक्तियां होगी। निगम राजस्व हानि के भय से राजनेताओं के हस्तक्षेप से रिक्त पदों की आने वाली मांग को दरकिनार नहीं कर रहा है।
ऐसे चल रहा नौकरी दिलवाने का धंधा
निगम पूरी तरह से मुख्य नियोक्ता विभाग पर निर्भर है, जिसका फायदा राजनेता उठा रहे हैं। राजनेता अपने चहेतों के लिए रसूख वाले विभागों से रिक्त पदों की मांग निगम को भिजवाते हैं। राजनेता जिन पदों को सृजित करवाते हैं उनके साथ अभ्यर्थियों की सूची भी संलग्न रहती है, जिन्हें प्रायोजित करना निगम की मजबूरी है।
इतना ही नहीं अगर मुख्य नियोक्ता बिना सिफारिश के पद भरने की मांग भेजे तो प्रायोजित जनपद उसी जनपद का होना चाहिए जहां पद खाली है। ऐसे में निगम के प्रायोजित अभ्यर्थियों पर विधायक अंगुली उठाकर अपने चहेतों की सिफारिश करते हैं, जिससे कई बार राजनीतिक बवाल हो चुका है।
क्या है भर्ती की प्रक्रिया
आउटसोर्सिंग पर भर्ती पूरी तरह से सरकारी महकमों के रिक्त पदों पर निर्भर करती है। निगम के पास कोई रिक्त पद नहीं होते मुख्य नियोक्ता विभाग खाली पदों की मांग भेजता है। विभाग पद के लिए अभ्यर्थी की वांछित शैक्षणिक व अन्य योग्यता निर्धारित करता है। उपनल विभाग के निर्धारित मानदंडों के अनुरूप योग्य अभ्यर्थी को प्रायोजित पत्र देता है।
मुख्य नियोक्ता का अधिकार सर्वोपरि
उपनल के प्रायोजित पत्र का अर्थ नियुक्ति पत्र नहीं है। यह पूरी तरह से मुख्य नियोक्ता विभाग पर निर्भर करता है कि प्रायोजित अभ्यर्थी को नौकरी पर रखा जाए या नहीं। प्रायोजित कर्मचारी की सेवा अवधि और नौकरी समाप्त करने का अधिकार विभाग के पास है।