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बदहाल है राजधानी का सबसे पड़ा अस्पताल, चल रहीं दो व्यवस्थाएं

Thu, 09 Jun 2016 04:36 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून

सार

  • राजकीय दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल में चल रही दो तरह की व्यवस्थाएं
  • अधिकारियों के बीच तालमेल ना होने से ढर्रे पर नहीं आ पा रहा अस्पताल
  • उधार पर हो रहा दवा का इंतजाम, सामान्य सुविधाओं को भी भटक रहे मरीज
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दून अस्पताल - फोटो : file photo
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विस्तार
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दून अस्पताल और दून महिला अस्पताल का राजकीय दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल में एकीकरण भले ही हो गया हो लेकिन व्यवस्थाओं में सुधार नहीं हो पाया है। आलम यह है कि एक ही अस्पताल में दो तरह की व्यवस्थाएं चल रही हैं। दोनों तरफ के अधिकारी एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डाल रहे हैं।
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राजकीय दून मेडिकल कॉलेज में दो अलग-अलग तरह की प्रशासनिक व्यवस्थाएं चल रही है। अस्पताल में चिकित्साधीक्षक तैनात हैं जबकि महिला अस्पताल की व्यवस्थाएं सीएमएस के जिम्मे की गई हैं। दून अस्पताल में वित्तीय और प्रशासनिक सभी अधिकार चिकित्साधीक्षक के पास है।

वहीं दूसरी ओर दून महिला अस्पताल में वित्तीय व्यवस्था सीएमएस डॉ. मीनाक्षी जोशी के अधीन है। ऐसे में तकनीकी रूप से अस्पताल की प्रशासनिक व्यवस्था की जिम्मेदारी भी सीएमएस की बनती है। हालांकि अब किसी भी विवाद की स्थिति में वह अपनी जिम्मेदारी ना होने की बात कहते हुए ज्यादातर मामलों से अपना पल्ला झाड़ लेती हैं। दूसरी ओर चिकित्साधीक्षक डॉ. केके टम्टा अपने पास अधिकार ना होने का हवाला देते हैं। इससे अस्पताल की अव्यवस्थाओं में सुधार नहीं हो पा रहा है।
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बाजार से दवा खरीदने को हैं मजबूर

दवा
एलपी की व्यवस्था समाप्त होने के बाद मरीज कई दवाएं बाजार से खरीदने को मजबूर हैं। मेडिकल कॉलेज का हिस्सा बनने के बाद काफी समय तक यह व्यवस्था जारी रही। लेकिन बाद में चिकित्सा शिक्षा विभाग के अधीन आए अस्पताल में यह व्यवस्था समाप्त करनी पड़ी। 

उधार में चल रहा काम
अस्पताल में कई तरह की दवाओं का भी संकट बना हुआ है। स्वास्थ्य विभाग से उधार पर अस्पताल को दवा मिल रही है। स्वास्थ्य विभाग ने चिकित्सा शिक्षा विभाग को 20 दिनों के भीतर वापस करने की शर्त पर दवा उपलब्ध कराई है। अस्पताल सूत्रों की माने तो स्वास्थ्य विभाग ने ज्यादातर वही दवाएं उपलब्ध कराई है, जो पहले से पर्याप्त मात्रा में है। 

सीनियर-जूनियर की लड़ाई
दून महिला अस्पताल में सीनियर-जूनियर की लड़ाई भी चरम पर है। बताया जा रहा है कि स्वास्थ्य विभाग के सीनियर चिकित्सक अस्पताल में चिकित्सा शिक्षा विभाग के जूनियर चिकित्सकों को अधिक तवज्जो दिए जाने से खुश नहीं हैं। इसके चलते अस्पताल में चिकित्सकों के अलग-अलग गुट बने हुए हैं।
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अभी तक स्पष्ट नहीं की स्थिति

डॉक्टर
अस्पताल में दो तरह की व्यवस्थाएं होने के पीछे शासन स्तर से स्थिति स्पष्ट ना होने का हवाला दिया जा रहा है। दून अस्पताल के मामले में शासनादेश जारी कर चिकित्साधीक्षक को सभी तरह के अधिकार दिए गए। हालांकि दून महिला अस्पताल के मामले में ऐसा कोई अलग आदेश नहीं हुआ। लेकिन क्योकि दोनों अस्पतालों का एकीकरण किया गया है, इसलिए यह आदेश दोनों अस्पतालों पर लागू होगा। 

अस्पताल में वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार सीएमएस के पास हैं। उन्हें अस्पताल की अन्य व्यवस्थाएं भी देखनी चाहिए। एकीकरण के बाद यह चिकित्साधीक्षक की जिम्मेदारी है लेकिन सीएमएस होने के कारण उनके अधिकार क्षेत्र में अतिक्रमण नहीं किया जा सकता है।
-डॉ. केके टम्टा, चिकित्साधीक्षक
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