उत्तराखंड में उच्च शिक्षा के सुधार के नाम पर प्रदेश सरकार ने नौ सदस्यीय समिति तो बनाई है, लेकिन नौ सदस्यीय इस समिति में एक ऐसे व्यक्ति को शामिल किया गया है जिसकी शैक्षिक योग्यता आठवीं पास है।
सरकार की मंशा भी कठघरे में
प्रदेश सरकार के अनुमोदन पर हुए इस मनोनयन पर सवाल उठने लगे हैं। इससे अफसरों की कार्यशैली और समिति के गठन पर सरकार की मंशा भी कठघरे में है।
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प्रदेश में उच्च शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए सरकार ने अब शिक्षाविदों की समिति बनाई है, लेकिन इसमें शामिल सदस्यों की ही शैक्षिक योग्यता का कोई ध्यान नहीं रखा गया है।
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सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत राजेंद्र नगर रुड़की निवासी जगन्नाथ कुकसाल ने जानकारी मांगी तो पता चला कि समिति में शामिल विनोद नेगी निवासी नेहरू कॉलोनी की शैक्षिक योग्यता आठवीं पास है।
नेगी को वर्ष 1983 में मंगला देवी जूनियर हाईस्कूल देहरादून से यह कक्षा पास होना बताया गया है। यह भी बताया गया कि वर्ष 2013 में उन्होंने नेहरू कॉलोनी वार्ड से नगर निगम पार्षद का चुनाव लड़ा था।
लाखों रुपए खर्च, नतीजा सिफर
विभागीय सूत्रों की मानें तो समिति से पहले उच्च शिक्षा में उपाध्यक्ष का मनोनयन किया जाता था। हर माह 70 से 80 हजार रुपए आफिस, मानदेय, टीए, डीए आदि पर खर्च किया जाता था। लेकिन विभाग में कोई सुधार नहीं हुआ।
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हाल यह है कि राज्य गठन के 13 साल बाद भी उच्च शिक्षा निदेशालय का अपना भवन नहीं है। हल्द्वानी डिग्री कॉलेज के दो कमरों में यह चल रहा है। दूसरी ओर, प्रदेश में कई कालेजों के पास भूमि और अपना भवन तक नहीं है।
उच्च शिक्षा निदेशक से मैंने पूछा है कि यह समिति काम क्या करेगी। इस समिति का गठन पहली बार किया गया है। पूरी प्रक्रिया राजनीतिक सिफारिश पर आधारित है।
- मनीषा पंवार, उच्च शिक्षा सचिव
प्रदेश में जब अनपढ़ लोग शिक्षा मंत्री बन सकते हैं तो मैं उच्च शिक्षा उन्नयन समिति में शामिल क्यों नहीं हो सकता, विधायक ने मुझे इस समिति में शामिल कराया है।
- विनोद नेगी, उच्च शिक्षा उन्नयन समिति के सदस्य
नए विभाग में एक महीने तक कुछ दिक्कतें हुई थीं, लेकिन अधिकारी मुझे घुमा दें, ऐसा नहीं था। रही बात मेरे उच्च शिक्षित न होने की तो मेरे पास मदद के लिए उच्च शिक्षित सलाहकारों की टीम थी।
- खजानदास, पूर्व शिक्षा मंत्री