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उत्तराखंड के CM बहुगुणा ने सौंपा इस्तीफा

Fri, 31 Jan 2014 01:31 PM IST
अमर उजाला, देहरादून
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उत्तराखंड के मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने शुक्रवार को राज्यपाल डॉ. अजीज कुरैशी को इस्तीफा सौंप दिया। जिसे राज्यपाल ने मंजूर कर लिया है। इस दौरान उन्होंने विधायकों से अपील की है कि सभी विधायक सोनिया गांधी द्वारा सीएम चुने जाने का प्रस्ताव पारित करें।
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इस बीच खाली कुर्सी पर सबसे प्रबल दावा केंद्रीय मंत्री हरीश रावत का माना जा रहा है, अगर पिछले दो सत्ता परिवर्तनों की तरह इस बार भी उनके खिलाफ कोई बड़ा उलटफेर न हुआ तो। विधानमंडल की बैठक में नेता का चुनाव किया जाएगा।

आलाकमान की ओर से नए मुख्यमंत्री की घोषणा

पहली फरवरी को प्रदेश को आठवां मुख्यमंत्री मिल जाएगा। मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा द्वारा शुक्रवार को राज्यपाल को इस्तीफा सौंप ‌दिया गया।

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इसके बाद अब आलाकमान की ओर से नए मुख्यमंत्री के नाम की घोषणा हो जाएगी। जिस पर पहली फरवरी को विधान मंडल दल की बैठक में मुहर लगेगी। कांग्रेस प्रदेश सह प्रभारी संजय कपूर गुरुवार को देहरादून पहुंचे।

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उन्होंने राज्यपाल डॉ. अजीज कुरैशी से मुलाकात भी की। हालांकि उनका कहना है कि यह शिष्टाचार भेंट थी। उन्होंने बताया कि पहली फरवरी को विधानमंडल दल की बैठक बुलाई गई है।

पूरे दिन चलती रहीं इस्तीफा देने की खबरें

मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा और केंद्रीय मंत्री हरीश रावत के अपने-अपने पदों से इस्तीफा देने की खबरें गुरुवार पूरे दिन चलती रहीं। मुख्यमंत्री को शुक्रवार सुबह दस से ग्यारह बजे के बीच राजभवन से समय मिला थ्‍ाा।

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दिन भर लगते रहे कयास
मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा के इस्तीफे की सूचना के साथ नए मुख्यमंत्रियों के नामों को लेकर कयास चलते रहे। केंद्रीय मंत्री हरीश रावत का खेमा पूरी तरह से आश्वस्त तो दिखा लेकिन कोई कुछ बोलने को तैयार नहीं था।

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वहीं दोपहर में जैसे ही सूचना आई कि सतपाल महाराज भी अपने समर्थक विधायकों के साथ कांग्रेस के बड़े नेताओं से मिलकर दावा ठोक रहे हैं तो फिर समीकरण बदलते दिखे। इंदिरा हृदयेश दिल्ली में ही हैं और हरीश रावत के नाम पर सहमति न बनने की दिशा में अपना दावा ठोक रही हैं।

हरीश का आगमन तय!

काफी जद्दोजहद के बाद कांग्रेस हाईकमान ने आखिरकार हरीश रावत को उत्तराखंड की कमान सौंपने का फैसला कर लिया है। इससे अब रावत की ताजपोशी तकरीबन तय है। इस फैसले की अब औपचारिक घोषणा होनी बाकी है।

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केंद्रीय पर्यवेक्षक के तौर पर शुक्रवार को देहरादून पहुंच रहे केंद्रीय गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे और स्वास्थ्य व परिवार कल्याण मंत्री गुलाम नबी आजाद की मौजूदगी में विधायक कांग्रेस हाईकमान के फैसले पर मुहर लगाएंगे। अंतिम समय में कोई बदलाव नहीं हुआ तो रावत वसंत पंचमी यानी 4 फरवरी को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे।
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कांटों भरा ताज, चुनौतियां बेशुमार

हालांकि प्रदेश के जो सियासी हालात हैं उसमें मुख्यमंत्री का ताज कांटों भरा ही होगा। सरकार के मुखिया के तौर पर रावत के सामने सबसे बड़ी चुनौती लोकसभा चुनावों में पार्टी के लिए पिछली सफलता दोहराने की है।

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पिछले चुनाव में कांग्रेस ने प्रदेश की सभी पांचों लोकसभा सीटों पर अपना परचम लहराया था। लेकिन अब केंद्र की मनमोहन सिंह की अगुवाई वाली सरकार व प्रदेश की बहुगुणा सरकार के प्रति लोगों की भारी नाराजगी कहीं चुनावों में भारी न पड़े इसलिए इसलिए प्रदेश में नेतृत्व परिवर्तन का फैसला किया गया।

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इसके अलावा रावत के सामने आपदा से कराह रहे पर्वतीय जिलों के बाशिंदों के जख्मों पर मरहम लगाने की भी चुनौती होगी। लगभग आठ माह गुजर जाने के बाद भी पीड़ितों को वायदों और आश्वासनों की घुट्टी ही मिली है। कर्मचारी असंतोष, बेलगाम अफसरशाही और लचर स्वास्थ्य व्यवस्था भी रावत की भरपूर अग्निपरीक्षा लेंगे।

कौन देगा अपनी सीट
हरीश रावत प्रदेश के नए मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ लेते हैं तो उनकी पार्टी नहीं बल्कि भाजपा का एक विधायक अपनी सीट उन्हें सौंपने जा रहा है। ऐसा ही कुछ भाजपा कार्यकाल में भुवन चंद्र खंडूरी के समय हुआ था।

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वहीं, मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा के लिए भाजपा के विधायक किरण मंडल ने सितारगंज सीट छोड़ी थी। हरीश रावत ने आलाकमान के सामने विधायकों की संख्या के लिए यही तर्क रखा है।
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