उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के आपदाग्रस्त गोविंदघाट क्षेत्र में सातवीं बार भी न पहुंचने से ग्रामीणों में खासा आक्रोश है।
गुरुवार को मौसम खराब होने के चलते मुख्यमंत्री का गोविंदघाट दौरा रद्द होने की सूचना जैसे ही गोविंदघाट पहुंची तो यहां प्रशासन की व्यवस्थाएं धरी की धरी रह गई। गुस्साए प्रभावितों ने जोशीमठ एसडीएम पर अपना गुस्सा उतारा।
ग्रामीणों ने कहा कि वे अपना जरुरी कार्य छोड़कर सीएम से अपना दर्द सुनाए आए थे, लेकिन उनके न पहुंचने से उन्हें मायूस होकर लौटना पड़ रहा है। प्रभावितों ने कहा कि मुख्यमंत्री जले पर नमक छिड़कने का काम कर रहे हैं।
गुरुवार को यह सातवां मौका था जब मुख्यमंत्री का आपदा प्रभावित क्षेत्र गोविंदघाट का दौरा रद्द हुआ है। यहां मुख्यमंत्री के आने की इंतजारी में चमोली, निजमुला, पीपलकोटी, घाट, जोशीमठ, पांडुकेश्वर, बदरीनाथ, बेनाकुली, लामबगड़, भ्यूंडार और उर्गम घाटी के आपदा प्रभावित पहुंचे थे।
पांडुकेश्वर के अरविंद शर्मा का कहना है कि उनका आवासीय भवन अलकनंदा नदी में बह गया है। वे बैंक से कम ब्याज पर ऋण देने की मांग को लेकर सीएम से मिलने आए थे, लेकिन अब मायूस होकर लौटना पड़ रहा है।
निजमुला घाटी के मोहन सिंह नेगी का कहना है कि घाटी में सड़क, स्वास्थ्य, पेयजल और शिक्षा व्यवस्था ठप पड़ी हुई है। इसी मामले को लेकर सीएम से मिलने आए थे, लेकिन अब बैरंग लौटना पड़ रहा है।
खर्च 30 लाख, फिर भी नहीं हुए दर्शन
मुख्यमंत्री का गोविंदघाट दौरा भले ही सातवीं बार रद्द हुआ हो, लेकिन इस आपदा की घड़ी में उनके दौरों पर जिला प्रशासन व शासन लगभग 30 लाख रुपये खर्च कर चुका है।
जब भी मुख्यमंत्री के आने का कार्यक्रम जिला मुख्यालय पहुंचता है तो सभी जिलास्तरीय अधिकारी नियत समय से एक दिन पूर्व मौके पर पहुंच जाते हैं। देहरादून से मुख्यमंत्री के सुरक्षा कर्मियों का दश्ता भी सात बार जनपद में पहुंचा।
जनपद की पुलिस फोर्स भी प्रत्येक बार हेलीपेड व संबंधित क्षेत्रों में तैनात रही। जिला प्रशासन के सूत्रों की मानें तो अभी तक सीएम के प्रस्तावित दौरों पर करीब 30 लाख रुपये तक का खर्चा किया जा चुका है।
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