उत्तराखंड के मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा या तो आंध्र प्रदेश की मुख्यमंत्री जयललिता और पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल की तर्ज पर वेतन के तौर पर एक रुपए लेते हैं। या फिर यह कहने का साहस नहीं जुटा पाए कि उन्हें कितना वेतन व भत्ता मिलता है।
कमेटी ने हिमाचल मॉडल अपनाया
उनकी मानें तो उन्हें विधायकों से भी कम वेतन मिलता है। जबकि सरकार की ओर से कैबिनेट मंत्री के बराबर वेतन-भत्ता मुख्यमंत्री को दिया जाता है। वेतन-भत्ता तय करने के लिए बनाई गई कमेटी ने हिमाचल मॉडल अपनाया है लेकिन कुछ मामले में उससे भी आगे निकल गए हैं।
कैबिनेट ने सिर्फ विधायकों के वेतन-भत्ते में इजाफा नहीं किया मंत्रियों के वेतन में भी तीन गुना बढ़ोत्तरी हुई है। कैबिनेट के फैसले को बजट सत्र में पेश कर सदन की मुहर लगनी है।
विधायकों व मंत्रियों केवेतन-भत्ते के इजाफे पर मुख्यमंत्री का कहना है कि इसके लिए विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल की अध्यक्षता में विधायकों की एक समिति बनी थी। उसकी शिफारिशों को ही कैबिनेट ने मंजूरी दी है।
जनता पर पड़ेगा भार
उनका कहना है कि हमने हिमाचल की तर्ज पर वेतन-भत्ते का फैसला है। प्रदेश की जनता पर भार पड़ेगा इस पर सवाल पर मुख्यमंत्री का कहना है कि जब हम राजस्व के मामले में आगे बढ़ रहे हैं तो विधायकों की सेलरी के मामले में पीछे क्यों रह जाए।
उनका तर्क है कि यहां की भौगोलिक परिस्थितियों में विधायकों को अधिक दौड़ भाग और खर्च करना पड़ता है। मंत्रियों को
अभी वेतन के तौर पर 15 हजार मिलते थे जो 45 हजार हो गए हैं। विधायकों की तर्ज पर उनका भी निर्वाचन क्षेत्र भत्ता 30 हजार से साठ हजार हो गया है।
भत्तों में भी इजाफा किया
दैनिक भत्ते में बढ़ोत्तरी केसाथ अब उन्हें चिकित्सा भत्ता क्लास वन अधिकारी के तरह मेडिकल बिल केआधार पर होगा। जबकि स्पीकर, डिप्टी स्पीकर और प्रतिपक्ष के भत्तों में भी इजाफा किया गया है।
इनके मकानों के रखरखाव का जिम्मा वैसे तो राज्य सम्पत्ति विभाग का ही होगा लेकिन सौंदर्यीकरण केलिए प्रतिमाह स्पीकर को 20 हजार, डिप्टी स्पीकर को 15 हजार और नेता प्रतिपक्ष को दस हजार रुपए मिलेंगे।
पूर्व की तरह वाहन, ईधन, रेल कूपन, रेल सुविधा, वायुयान सुविधा, टेलीफोन, फुटकर खर्च और नि:शुल्क सर्किट हाउस की सुविधा भी मिलती रहेगी।