उत्तराखंड के सभी नेता इन दिनों इशारों-इशारों में अपनी बात करने लगे हैं। लोकसभा सीटों के लिए कांग्रेस उम्मीदवारों के नामों का पैनल नहीं भेजे जाने पर जब मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा से पूछा गया कि कुछ नेताओं की नजरें अपकी कुर्सी पर हैं इसलिए नामों का पैनल नहीं भेजा गया। मुख्यमंत्री तपाक से बोले नजरें कुर्सी पर हैं, ठीक है, किसी की पीठ तो इधर नहीं है।
आलाकमान पर छोड़ा फैसला
लोकसभा उम्मीदवारों के पैनल को लेकर मुख्यमंत्री का कहना है कि अधिकार का प्रस्ताव भेजना केंद्रीय नेतृत्व का सम्मान है। अगर निर्देश होंगे तो नामों का पैनल भेज दिया जाएगा। सोनिया गांधी और राहुल गांधी के पास उत्तराखंड के ऐसे पांच सौ नाम हैं जो चुनाव लड़ सकते हैं।
केंद्र सरकार से तमाम अड़चनें दूर कराने के लिए मुख्यमंत्री लगातार दिल्ली दौरा कर रहे हैं। उनका कहना है कि अब अकेले मुख्यमंत्री ही नहीं दौड़ेगा काम आगे नहीं बढ़ेगा तो विधायकों को दिल्ली जाना होगा। ताकि प्रदेश में पुनर्निमाण के काम में तेजी आए।
केजरीवाल को कहा नौसिखिया
जब मीडिया ने सवाल पूछा कि इन दिनों दिल्ली के मुख्यमंत्री भी धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं तो क्या कांग्रेस विधायकों के साथ आप भी। अचानक मुख्यमंत्री के निशाने पर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल आ गए।
उन्होंने कहा कि हम अराजकता नहीं कर सकते हैं। पद की गंभीरता होती है। केजरीवाल नए-नए सत्ता में आए हैं, सीख जाएंगे।
संगठन में उठ रहे सवाल
दूसरी ओर पैनल न भेजे जाने को लेकर कांग्रेस संगठन में सवाल उठने लग हैं। प्रदेश उपाध्यक्ष सूर्य कांत धस्माना का कहना है कि राष्ट्रीय नेतृत्व जमीनी और आम आदमी की पसंद को तव्वजो देने की बात कह रहा है।
यह सच है कि अंतिम फैसला लेने का अधिकार नेतृत्व का है लेकिन अगर निचले स्तर के कार्यकर्ताओं की भावना की उपेक्षा होगी तो पार्टी का संगठनात्मक ढांचा ही चरमरा जाएगा।
हरीश रावत और साकेत बने रहे चर्चा में
कांग्रेस में अंदरखाने यह भी चर्चा है कि हरीश रावत का नाम उम्मीदवार की सूची में चला जाता तो वह मुख्यमंत्री की दौड़ से खुद ब खुद बाहर हो जाते।
वहीं मुख्यमंत्री खेमा पैनल को लेकर इसलिए शांत रहा कि टिहरी लोकसभा से साकेत बहुगुणा का नाम आते ही हंगामा शुरू हो जाएगा। ऐसे में दोनों गुटों को आलाकमान पर फैसला छोड़ना बेहतर विकल्प लगा।