प्रो.सुरेखा डंगवाल और संजीव चोपड़ा ने डाला पुस्तक पर प्रकाश
इस दौरान पुस्तक पर चर्चा करते हुए दून विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो.सुरेखा डंगवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हिमालय से निकली आध्यात्मिक चेतना को आत्मसात कर राजनीति के मुख्य केंद्र तक पहुंचे हैं। उनकी राजनीतिक यात्रा को अगर समझना है तो उसके लिए तीन दशक पीछे जाते हुए उनके संघर्ष को समझना होगा। इस किताब में लेखकों ने उनके जीवन के हर पहलू को छुआ है।
लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासनिक अकादमी के पूर्व निदेशक संजीव चोपड़ा ने कहा कि प्रधानमंत्री ने कभी भी किसी समस्या को एक समस्या के रूप में नहीं देखा, बल्कि देश में छिपी क्षमता को सर्वश्रेष्ठ परिणामों के लिए अनुकूलित करने के अवसर के रूप में देखा।
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संजीव ने पुस्तक में तमाम लेखकों की ओर से प्रस्तुत किए गए लेखों के माध्यम से बताने का प्रयास किया कि कैसे पीएम मोदी ने गुजरात मॉडल से लेकर देश तमाम मुद्दों को एक आंदोलन बनाते हुए आगे बढ़ाया। वह अगर किसी व्यक्ति को कोई उपहार देते हैं तो उसमें भी कोई न कोई संदेश निहित होता है।