सरकार के सामने खर्च संभालने की चुनौती भी है। वेतन और पेंशन का खर्च बढ़ रहा है। वेतन खर्च की सालाना आठ प्रतिशत और पेंशन खर्च सात प्रतिशत वृद्धि दर है। नए ऋणों पर आठ प्रतिशत ब्याज दर का भुगतान अलग से है। इसे काबू में लाना सरकार के लिए आसान नहीं है।
सरकार के सामने अवस्थापना निर्माण के लिए पूंजीगत व्यय को बढ़ाने की भी चुनौती है। लेकिन बजट के आंकड़े बता रहे हैं कि पूंजीगत व्यय कम हो रहा। वित्त विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक, 2012-13 में पूंजीगत का व्यय 19.93 प्रतिशत उच्च स्तर था। 2019-20 में यह 14.10 प्रतिशत तक घट गया।
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सरकार ने पार्टी के चुनाव दृष्टिपत्र को अंगीकार किया है। उसमें किए गए संकल्पों को पूरा करने के लिए सरकार को अलग से आर्थिक साधन जुटाने होंगे। इसलिए सरकार पर खुद के संसाधनों से राजस्व बढ़ाने की भी चुनौती है। पंचम वित्त आयोग ने भी राज्य सरकार को व्यय नियंत्रण के साथ संसाधनों को जुटाने के उपाय करने का सुझाव दिया है। अनुत्पादक खर्चों को कम कर ऐसे निवेश करने पर जोर दिया गया है, जिससे राज्य के राजस्व में बढ़ोतरी हो सके।
राज्य सरकार के लिए केंद्रीय अनुदान राजस्व का प्रमुख स्रोत है। लेकिन केंद्र पोषित योजनाओं के तहत आवंटित धनराशि का भी पर्याप्त इस्तेमाल नहीं हो पाता है। वर्ष 2019-20 में 8308.76 करोड़ अनुदान प्राप्त हुआ था। वित्तीय वर्ष 2022-23 में सरकार को 20835.30 करोड़ का केंद्रीय अनुदान प्राप्त होने का अनुमान है।
बजट का पूर्वानुमान वित्तीय वर्ष
2019-20(वास्तविक)- 47494.78
2020-21(पुनरिक्षित) -53526.37
2021-22 (अनुमान) -57400.300
2022-23 (पूर्वानुमान)-58161.76
2023-24- 62355.33
2024-25-66886.52
2025-26-71709.26
2026-17- 76985.52
स्रोत : पंचम राज्य वित्त आयोग का प्रतिवेदन