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मुख्यमंत्रियों पर लगाम कसने को PM मोदी का नया 'पैतरा'

Tue, 24 Mar 2015 12:12 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून/नई दिल्ली
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की राज्यों के मुख्य सचिवों को सीधे संबोधित करने की योजना का विरोध शुरू हो गया है। प्रधानमंत्री कार्यालय के इस कदम पर भाजपा शासित राज्यों की सरकारें तो चुप हैं, लेकिन उत्तराखंड समेत कांग्रेस शासित राज्य इसे संघीय ढांचे के विपरीत मान रहे हैं।
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उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा है कि मुख्य सचिवों से सीधे संवाद की परंपरा ठीक नहीं है। प्रधानमंत्री को मुख्यमंत्री से ही बात करनी चाहिए थी। हालांकि उन्होंने कहा कि वे इस (संवाद की) प्रक्रिया में बाधा नहीं डालेंगे।

वरिष्ठ मंत्री इंदिरा हृदयेश ने भी कहा है कि मुख्यमंत्रियों की अनदेखी कर सीधे प्रदेश के मुख्यसचिव से राज्य के मुद्दों पर पीएम का संवाद संघीय व्यवस्था में अनावश्यक हस्तक्षेप है। इंदिरा ने इसे राज्य के अधिकारों का अतिक्रमण भी बताया। कहा कि अच्छा होता कि पीएम मुख्यमंत्रियों के साथ वीडियो कांफ्रेंसिंग पर बात करते।
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राज्यों के मुख्य सचिवों की होगी वीडियो कांफ्रेंसिंग

बताया जाता है कि हर महीने के आखिरी बुधवार को प्रधानमंत्री के साथ सभी केंद्रीय मंत्रालयों के सचिवों और राज्यों के मुख्य सचिवों की वीडियो कांफ्रेंसिंग होगी। प्रधानमंत्री कार्यालय इस नए प्रयोग की शुरुआत दो दिन बाद 25 मार्च से करने की तैयारी कर रहा है।

हिमाचल सरकार ने इसे लोकतंत्र के खिलाफ बताया है। राज्य के राजस्व एवं कानून मंत्री कौल सिंह ठाकुर और शहरी विकास मंत्री सुधीर शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री को अगर बात ही करनी है तो मुख्यमंत्रियों से बात करनी चाहिए। मुख्य सचिव से संवाद स्थापित करना गलत परंपरा की शुरुआत है।

इसे किसी भी सूरत में जायज नहीं ठहराया जा सकता। वहीं, कांग्रेस महासचिव शकील अहमद का कहना है कि बिना राज्यों से विस्तृत सलाह मशविरा किए और सहमति बनाए ऐसा करना संघीय ढांचे के खिलाफ होगा। मुख्य सचिव राज्य सरकारों के अधीन होते हैं और नियमित रूप से ऐसा होने पर केंद्र और राज्य के बीच टकराव हो सकता है।
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PM अब मुख्य सचिवों से करेंगे विकास की बात

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आगामी 25 मार्च को सभी राज्यों के मुख्य सचिवों के साथ संबंधित राज्य के विकास आदि मुद्दों पर वीडियो कॉन्फ्रंसिंग करेंगे। यह पहली बार होगा जब प्रधानमंत्री सीधे राज्यों के मुख्य सचिवों से मुखातिब होंगे।

उत्तराखंड में पीएम का वार्ता का केंद्र बिन्दु खासतौर पर केदारनाथ पुनर्निर्माण होगा। क्योंकि अगले महीने राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी भी दो दिन के प्रवास पर उत्तराखंड आ रहे है। वह केदारनाथ दर्शन करने भी जाएंगे। इससे पहले दैवी आपदा के समय 2013 में मोदी भी केदारनाथ धाम को गोद लेने की बात कह चुके है।

मुख्य सचिव एन रविशंकर ने बताया कि आगामी 25 मार्च को प्रधानमंत्री के साथ होने वाली वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की सूचना पीएमओ से मिल चुकी है। एजेंडा बहुत विस्तृत तो नहीं है लेकिन चूंकि पहली बार यह हो रहा है तो अपने आप में महत्वपूर्ण कदम है।

सरसरी तौर पर जिन बिन्दुओं पर तैयारी करने के संकेत हैं उनमें राज्य में संचालित केंद्र वित्त पोषित योजनाओं के साथ ही प्रोजेक्ट मैनेजमेंट पर बात होनी है। इसके अलावा प्रधानमंत्री जन शिकायत सिस्टम पर बात करेंगे।
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