मुख्यमंत्री हरीश रावत तक पहुंच वाले कांग्रेस नेताओं ने सड़क की बुरी हालत पर कई बार शिकायत की, लेकिन इनकी शिकायतों पर मुख्यमंत्री के निर्देश पर जारी होने वाले पत्रों को संबंधित विभाग द्वारा गंभीरता से नहीं लिया गया।
अंदाजा लगाया जा सकता है कि सरकारी विभागों में जब ‘मुख्यमंत्री’ की सुनवाई नहीं होती तो आम जनता के दुख-दर्द से अधिकारियों को कितना सरोकार होगा?
मामला एक
बल्लूपुर की सड़क निर्माण के लिए नगर निगम पार्षद प्रत्याशी रही कोमल वोहरा ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखा था। इस पर मुख्यमंत्री के प्रभारी सचिव अमित सिंह नेगी ने छह जून 2014 को जानकारी दी कि इस संबंध में सचिव लोक निर्माण विभाग को पत्र भेजा गया है। लेकिन इस सड़क पर आज तक कोई काम नहीं हुआ।
मामला दो
राजेंद्रनगर गली नंबर 11, वन विहार एवं इंदर विहार की सड़कों के निर्माण और मरम्मत के लिए महानगर कांग्रेस वरिष्ठ उपाध्यक्ष दीप वोहरा ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन दिया। इस पर प्रभारी सचिव मुख्यमंत्री डा. निधि पांडेय ने 25 अगस्त 2014 को वोहरा को पत्र लिखा कि संबंधित विभाग को पत्र भेजा गया है। लेकिन इस सड़क पर भी कोई काम नहीं हुआ।
मुख्यमंत्री ने किया था निरीक्षण
मुख्यमंत्री कार्यालय से लगभग हर रोज किसी न किसी शिकायत, जनसमस्या पर संबंधित विभागों को पत्र जिला प्रशासन के माध्यम से भेजे जाते हैं। लेकिन इन पर कार्रवाई नहीं होती।
सूत्र बताते हैं कि इस बाबत शिकायतें मिलने के बाद ही करीब एक सप्ताह पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने जिला मुख्यालय जाकर कार्यालयों के हर पटल का निरीक्षण किया था। उन्होंने हर पटल पर प्रशासनिक अधिकारियों से सवाल-जवाब किए थे।
तीन सौ पत्र लंबित, नोटिस जारी
मुख्यमंत्री के निरीक्षण के बाद जिला प्रशासन ने मुख्यमंत्री संदर्भ के शिकायती पत्रों की तलाश शुरू की। पता चला कि ऐसे करीब तीन सौ पत्र लंबे समय से लटके हैं।
प्रशासन ने संबंधित विभागों को नोटिस जारी कर दिया है। बृहस्पतिवार को इनकी समीक्षा की जाएगी। बताया जा रहा है कि अब राज्यपाल, सूचना आयोग और शासन के अधिकारियों के संदर्भ वाले शिकायती पत्रों की भी सूची बनाई जा रही है।
मुख्यमंत्री संदर्भ के शिकायती पत्र और संबंधित अफसर
अधिकारी/ विभाग - पत्र
मुख्य विकास अधिकारी - 45
मुख्यनगर अधिकारी - 61
उप जिलाधिकारी सदर - 38
तहसीलदार सदर - 121
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक - 65
एमडीडीए - 11
(ये पत्र सिर्फ जनवरी 2014 के हैं, एक मई 2013 से 31 दिसंबर 2014 तक मुख्यमंत्री कार्यालय से कुल 873 शिकायती पत्र जिला प्रशासन को भेजे गए)
मुख्य मुद्दे
- मुख्यमंत्री राहत कोष से सहायता
- अवैध कब्जे हटाए जाना
- पुश्ता, बाड़ का निर्माण
- आपदा राहत धनराशि की मांग
- जमीन की पैमाइश
- पेंशन पट्टे की रिपोर्ट
अलग-अलग शिकायतें तकरीबन 70 विभागों से संबंधित हैं। आदेश कर दिए गए हैं कि शासन, आयोग संदर्भ की शिकायतों की अलग-अलग सूची बनाई जाएगी। वैसे हर स्तर से आने वाली शिकायतों का निस्तारण हो रहा है। और तेजी लाई जाएगी।
-प्रताप सिंह शाह, एडीएम वित्त
स्थिति खराब है। बेलगाम अधिकारी भाजपा विधायकों के पिट्ठू बने हुए हैं। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने लोनिवि मुख्य अभियंता ललित मोहन का घेराव किया था। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष से भी शिकायत की। उन्होंने अभियंता को कहा कि मुख्यमंत्री कार्यालय से दो बार पत्र जारी होने पर भी काम क्यों नहीं हो रहा? फिर भी जमीन पर कोई काम नहीं हुआ है।
- दीप वोहरा, वरिष्ठ उपाध्यक्ष महानगर कांग्रेस कमेटी