कांग्रेस के बागी विधायकों का भाजपा में जाना मुख्यमंत्री हरीश रावत के लिए राहत देने वाला है। रावत की उलझनें बढ़ाने वाले पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा और पूर्व मंत्री हरीश रावत अब उनके रास्ते में नहीं आएंगे। बागी विधायकों का कांग्रेस से नाता टूटने पर पार्टी के अंदर रावत को अब नीति निर्णय में किसी का विरोध नहीं झेलना पड़ेगा। परदे से पीछे होने वाले इन नेताओं के गुटों के हमले बंद हो जाएंगे। हरीश रावत सुकून से पार्टी मामलों में निर्णय ले सकेंगे।
मुख्यमंत्री पद के लिए हरीश रावत के प्रदेश कांग्रेस के अंदर विजय बहुगुणा और हरक सिंह रावत ही मुख्य प्रतिद्वंदी रहे हैं। वर्ष 2013 में आपदा के बाद मुख्यमंत्री की कुर्सी जाने की टीस बहुगुणा के दिल को निरंतर सालती रही। इसके लिए वह हरीश रावत को जिम्मेदार मानते थे।
बहुगुणा हमेशा रावत सरकार के कामकाज में खामियां निकालते रहे। इसकी शिकायत हाईकमान से भी की जाती रही। बहुगुणा के भाजपा में जाने से अब यह दिक्कत हरीश रावत को नहीं आएगी।