उत्तराखंड के टिहरी में बूढ़ाकेदार पट्टी के निवाल और रक्स्या गांव में अलग-अलग स्थानों पर बादल फटने से चार गोशाला, तीन पशु, चार घराट और लगभग डेढ़ सौ नाली कृषि भूमि बह गई है।
सोमवार देर रात हुई इस तबाही से सिल तोक को जाने वाला पैदल पुल बह गया और रक्स्या गांव की पांच महिलाएं और एक बच्चा छानियों में फंस गए। बुधवार को बूढ़ाकेदार पट्टी के रक्स्या गांव में बादल फटने से सिल तोक गदेरे में क्षतिग्रस्त रास्ते पर प्रशासन ने वैकल्पिक व्यवस्था के लिए लकड़ी का पुल बना दिया। छानियों में रह रही महिलाओं ने गांव आने से इनकार कर दिया। महिलाओं का कहना है कि पशुओं के साथ वे छानियों में सुरक्षित हैं।
17 अगस्त की रात को निवाल और रक्स्या गांव में अलग-अलग स्थानों पर बादल फटने से पेयजल लाइन, सिंचाई गूल और रास्ते क्षतिग्रस्त हो गए थे। सिल तोक गदेरे का पैदल पुल बहने से रक्स्या गांव की सरदा देवी, रजनी देवी, हेमलता, कुसुम लता, सोना देवी और 12 साल का अजय छानियों में फंस गए थे।
एसडीएम जगदीश लाल ने बताया कि सिल तोक गदेरे में लकड़ी के तख्ते डालकर वैकल्पिक पुलिया तैयार कर लिया गया है, लेकिन छानियों में रह रही महिलाओं ने गांव आने से इनकार कर दिया। महिलाओं ने प्रशासन को बताया कि वे बरसात के दिनों में हमेशा ही छानियों में रहती हैं। उन्हें छानियों में किसी तरह की परेशानी नहीं है।
सोमवार रात करीब 10 बजे निवाल गांव में तेज बारिश होने से चिरवाली, बनाली, ओण, छेडी, कोठगा गदेरे में बादल फटे, जिससे गांव में भारी मात्रा में मलबा और पत्थर आ गया था।
निवाल गांव के बच्चन सिंह, श्रीचंद, बादर सिंह, बिशन सिंह की गोशाला बह गई। इन दिनों उनके पशु गांव से दूर छानियों में हैं। पेयजल लाइन, सिंचाई नहर भी क्षतिग्रस्त हो गई है।