पापनाशिनी मां गंगा के प्रति हमने काफी पाप किए हैं। अब वक्त है कि हम इनका प्रायश्चित करें। मोक्षदायिनी हमारे अत्याचारों और गलत बर्ताव से आहत हैं। हमने मन की गंदगी के साथ इसमें कचरा, मल-मूत्र तक फेंकना शुरू कर दिया। परिणाम यह है कि जीवनदायिनी मां गंगा गंदगी के शिकंजे में हैं।
बढ़ाए एक कदम
सरकारी दावे-वादे अपनी जगह हैं, हमारी भी जिम्मेदारी बनती है कि मुक्तिदायिनी की ‘मुक्ति’ के लिए आगे आएं। इसके लिए अमर उजाला रविवार से अभियान शुरू कर रहा है, जिसका समापन 19 अक्तूबर को होगा। आप भी ‘भगीरथ’ बन सकते हैं।
दशहरे की रात गंगनहर बंद किए जाने के बाद गंगा में जल घटा तो हरकी पैड़ी से लेकर ज्वालापुर तक जगह-जगह गंदगी दिख रही है। इसे साफ करना हम सबकी जिम्मेदारी है। इसीलिए इन 15 दिनों में हम सफाई के साथ-साथ जन जागरण भी करेंगे।
अभियान के साथ आए स्कूल-कॉलेज
विभिन्न संस्थाएं व स्कूल-कॉलेज इस अभियान में हमारे साथ जुड़ चुके हैं। लिहाजा हम कूड़ा-कचरा बाहर निकाल मां गंगा को साफ-सुथरा करके ही दम लेंगे। जागरूकता के लिए रैलियां निकाली जाएंगी।
पाठकों से सीधा संवाद होगा, यह जानने का प्रयास भी किया जाएगा कि गंगा को साफ बनाए रखने के लिए क्या किया जा सकता है। आप व्यक्ति या संस्था के तौर पर हमसे जुड़ सकते हैं। आपके साथ गंगा सफाई के अभियान को मुकाम तक पहुंचाया जाएगा।