दुनिया में कुल स्थलीय जमीन के तीन फीसदी से कम हिस्से पर बसे शहर पूरी दुनिया का 78 फीसदी कार्बन उत्सर्जन कर रहे हैं। इतना ही नहीं पूरी दुनिया में उपयोग किए जाने वाले कुल आवासीय जल में से 60 फीसदी हिस्सा शहरों में उपयोग किया जा रहा है। उक्त जानकारी भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद के महानिदेशक एवं अनुसंधान संस्थान के निदेशक अरुण सिंह रावत ने दी।
अरुण सिंह रावत शहरी जैव विविधता और पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं के लिए हरित स्थान का प्रबंधन विषय पर आयोजित सेमिनार में संबोधित कर रहे थे। प्रशिक्षण कार्यक्रम में देश के 22 राज्यों के भारतीय वन सेवा के अधिकारी हिस्सा ले रहे हैं। शहरी क्षेत्रों में हो रहे अनियंत्रित विकास और कार्बन उत्सर्जन पर गहरी चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि जैव विविधता संरक्षण और पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं के लिए शहरी वानिकी के महत्व और प्रबंधन पर जोर देना होगा। दुनिया के तमाम देशों में अनियंत्रित शहरीकरण के परिणाम स्वरुप कई शहरों में प्राकृतिक संसाधनों और पर्यावरण में भारी गिरावट दर्ज की गई है, जो चिंता का विषय है।
सेमिनार में दिल्ली विवि के प्रोफेसर सीआर बाबू ने कहा के यदि भविष्य में पर्यावरणीय खतरों से निपटना है तो इसके लिए शहरों में पर्यावरण संरक्षण को लेकर तमाम कदम उठाने होंगे। सेमिनार में यूनिवर्सिटी ऑफ मेलबर्न ऑस्ट्रेलिया की प्रोफेसर डॉ. सारा वेरॉन, सदर्न यूनिवर्सिटी अमेरिका के प्रोफेसर डॉ. यादोंग क्यूई, एफआरआई के जलवायु परिवर्तन प्रभाग के प्रमुख डॉ. विजेंद्र पंवार समेत कई विशेषज्ञों ने व्याख्यान दिए। इस दौरान एफआरआई के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रशिक्षण समन्वयक डॉ. हुकुम सिंह ने शहरी वानिकी में संभागीय उपलब्धियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी।