शिवभक्तों को प्रिय रुद्राक्ष का बाजार चीन के हस्तक्षेप से अचानक गर्म हो उठा है। एक माह के अंदर कई किस्म के रुद्राक्षों के दाम दस गुना तक बढ़ गए हैं।
पथरी रुद्राक्ष की नौ माला वाली थैली की कीमत पांच हजार रुपये थी अब वह 50 हजार को पार कर रही है। आठ से लेकर 14 मुखी रुद्राक्ष के दाम भी दोगुने हो गए हैं।
व्यापारियों का कहना है कि चीन ने अंतरराष्ट्रीय बाजार से रुद्राक्ष की इन किस्मों की भारी खरीद कर माल का संकट खड़ा कर दिया है। खपत के हिसाब से हरिद्वार को रुद्राक्ष की बड़ी मंडी माना जाता है।
चीन की खरीदारी से बढ़े दाम
व्यापारियों के मुताबिक हरिद्वार में एक साल में करीब 100 करोड़ रुपए का व्यापार होता है। यहां रुद्राक्ष बनारस से आता है लेकिन जुलाई से माल मिलने में परेशानी हो रही है।
इससे दाम आसमान छूने लगे हैं। रुद्राक्ष पर अचानक महंगाई से हरिद्वार का व्यापारी जगत हतप्रभ है। इनका कहना है कि बनारस के थोक बाजार में रुद्राक्ष अचानक महंगा हुआ है जिसका असर पूरे देश पर पड़ रहा है।
रुद्राक्ष की महंगाई पर हरिद्वार के सभी व्यापारियों का एक ही जवाब है। व्यापारी विनीत बंसल का कहना है कि बनारस की थोक मंडी में माल नेपाल और इंडोनेशिया से आता है।
चीन के लिए रुद्राक्ष है बेहद उपयोगी
वहां से चीन ने महंगे दामों पर थोक में माल उठा लिया है। इन्होंने बताया कि चीन रुद्राक्ष का उपयोग आभूषण बनाने के अलावा एक्यूप्रेशर की दृष्टि से उपयोगी कार के सीट कवर, बैक गद्दी, सोफा कवर आदि के लिए करता है।
इनको बनाने में पथरी रुद्राक्ष ज्यादा बेहतर माना जाता है। यह आकार में छोटा होने के अलावा खुरदुरा नहीं होता है।
इसके अलावा उसने आठ से 14 मुखी रुद्राक्ष पर भी आंख गड़ाई है।
रुद्राक्ष के दाम
मुखी - अब --- एक माह पहले
आठ - 1000 - 500
नौ - 1500 - 700
दस - 1000 - 500
ग्यारह - 2000 - 1000
बारह - 2500 - 1200
तेरह - 3000 - 1700
चौदह - 12000 - 7000
(नोटः यह दाम प्रति रुद्राक्ष दाना व रुपए में हैं।)
भगवान शिव का प्रतीक है रुद्राक्ष
ज्योतिषाचार्य डा. प्रदीप जोशी का कहना है कि भारतीय संस्कृति में रुद्राक्ष का बहुत महत्व है।
वास्तव में रुद्राक्ष तो भगवान शिव का प्रतीक माना जाता है। तीन मुखी रुद्राक्ष को शिव के त्रिनेत्र भी कहा गया है। मान्यता है कि एक मुखी और 14 मुखी रुद्राक्ष भगवान शिव को बहुत प्रिय हैं।
शिव स्वयं जटाओं, कंठ और भुजाओं में रुद्राक्ष धारण करते हैं। नेपाल में सभी प्रसिद्ध शिव मंदिरों के पास रुद्राक्ष का वृक्ष अवश्य होता है। रुद्राक्ष को अकेले अथवा माला के रूप में धारण किया जाता है।
पथरी रुद्राक्ष तो बाजार से गायब ही हो गया। कीमत 50 हजार रुपये प्रति थैली बताई जा रही है लेकिन इस पर भी बाजार में मिल नहीं रहा है। देश में रुद्राक्ष की भारी किल्लत हो गई है।
- अंकुश त्रिपाठी, संचालक, नेपाल रुद्राक्ष, हरकी पैड़ी हरिद्वार
देश में कभी रुद्राक्ष की इतनी किल्लत नहीं देखी। देश-विदेश से लोग रुद्राक्ष लेने हरिद्वार आते हैं। यहां इसकी कीमत देख उन्हें यकीन नहीं होता। यह महंगाई माल की कमी के कारण है।
- विजय अग्रवाल, संचालक, कृष्णा रुद्राक्ष, बड़ा बाजार हरिद्वार