फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

भारत को तबाह करने के लिए बाढ़ लाने की तैयारी में चीन!

Sun, 23 Jul 2017 10:42 AM IST
रजा शास्त्री/ अमर उजाला, देहरादून
विज्ञापन
China
विज्ञापन
देश की सीमा पर शत्रुतापूर्ण रवैया अपना रहा चीन मानसून के दौरान ऊंचाई पर स्थित झीलों और नदियों की बाढ़ को अस्त्र के रूप में इस्तेमाल कर सकता है।
विज्ञापन


चीन से निकल कर नेपाल और भारत की सरहद के अंदर आने वाली इन नदियों से अचानक आने वाली बाढ़ से बहुत नुकसान हो सकता है।

चीन के ट्रांसबाउंड्री निगरानी नीति का पालन न करने से केंद्रीय जल आयोग के फ्लड मैनेजमेंट आर्गेनाइजेशन (एफ एमओ) को चीन से बाढ़ और झीलों के संबंध में पूरी जानकारी नहीं मिल पा रही है।

नदियों के किनारे वॉटर टेस्टिंग सेंटर स्थापित किए जाने की जरूरत

flood
विज्ञानियों ने नदियों के किनारे वॉटर टेस्टिंग सेंटर स्थापित किए जाने की जरूरत बताई है। साथ ही निगरानी सिस्टम मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार को सुझाव दिया है।

चीन के ऊंचाई वाले इलाकों से ब्रह्मपुत्र, कोसी, गंडक समेत कई नदियां निकलकर भारत की सीमा में आती हैं। मानसून के दौरान अतिवृष्टि से इन नदियों पर अस्थायी बांध बन जाते हैं।

इनके आसपास बनी झीलें अचानक टूट जाती हैं, जिससे निचले इलाकों में खौफ नाक बाढ़ आ जाती है। बांध और झील अचानक टूटते हैं तो लोगों को संभलने का मौका नहीं मिल पाता।
 

चीन ने ट्रांसबाउंड्री निगरानी नीति पर सहमति जताई थी

सिक्किम सीमा - फोटो : AP
तिब्बत क्षेत्र से अचानक आने वाली बाढ़ नेपाल में आए दिन तबाही मचाती है। भारत में वर्ष 2002 में ब्रह्मपुत्र की बाढ़ ने बड़ी तबाही मचाई थी। उस वक्त नेपाल, भारत और चीन ने ट्रांसबाउंड्री निगरानी नीति पर सहमति जताई थी।

इसके तहत झील, बांध टूटने, ऊंचाई वाले इलाकों में बादल फ टने, अतिवृष्टि से बाढ़ आने की सूचना शेयर करने का प्रावधान है, लेकिन चीन ने कभी भी इसका पालन नहीं किया।

विज्ञानियों ने जब ब्रह्मपुत्र के पानी की जांच की तो पता चला कि यह पानी तो किसी पुरानी झील का है, जिसके बारे में चीन ने भारत को कभी कोई जानकारी नहीं दी थी।
विज्ञापन

दादागीरी वाला रवैया अपना रहा है चीन 

china
केंद्रीय जल आयोग के अधिकारिक सूत्रों का कहना है कि चीन से इस संबंध में जानकारी नहीं मिल पाती।

आयोग के फ्लड मैनेजमेंट आर्गेनाइजेशन के निदेशक वीडी राय का कहना है कि सिस्टम धीरे-धीरे विकसित किया जा रहा है। चीन से इस संबंध में समझौता भी हो रखा है। वैसे नदियों से आने वाले पानी की बराबर जांच कराई जाती है।

इस संबंध में पूर्व में भी चिंता जताई जा चुकी है। मौजूदा स्थिति में चीन दादागीरी वाला रवैया अपना रहा है। चीन के जलस्रोतों को हथियार के रूप में प्रयोग करने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता। मानसून में तेजी आ रही है। ऐसे में फ्लैश फ्लड को हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। नदियों के किनारे लैब स्थापित करके इनफॉर्मेशन सिस्टम मजबूत किया जाना चाहिए। 
- डॉ. संतोष राय, वरिष्ठ नदी विशेषज्ञ, वाडिया हिमालय भू विज्ञान संस्थान
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें