साइबर क्रिमिनल्स एक प्रोफेशनल टीम की तरह काम करते हैं। हर सदस्य की जिम्मेदारी तय होती है। एक एटीएम में स्कीमर फिट करेगा तो दूसरा उसे निकालेगा। तीसरे का काम एटीएम क्लोन से कार्ड तैयार करना होता है। सीसीटीवी कैमरों की फुटेज में क्रिमिनल्स की करतूत कुछ इसी तरह ही सामने आई है। पुलिस ने भी इसी हिसाब से कार्रवाई का खाका तैयार किया है। यह भी आशंका जताई गई है कि बेरोजगार युवकों को लालच देकर एटीएम से रकम निकलवाई जा सकती है।
साइबर क्रिमिनल्स के खिलाफ देहरादून पुलिस ने पहली बार इतने बड़े स्तर पर जांच शुरू की है। इससे जानकारी बढ़ने के साथ ही अपराध के तौर-तरीकों का भी पता चला है। साइबर एक्सपर्ट अंकुर चंद्रकांत के मुताबिक, साइबर किमिनल्स का काम करने का तरीका अलग होता है। वैसे तो हर कोई अपने काम में माहिर है। हर किसी काम का पहले से फिक्स है।
लेकिन बीच-बीच में एक-दूसरे की जिम्मेदारी बदल भी जाती है। उदाहरण के तौर पर यदि कोई एटीएम में स्कीमर और वेब कैमरा फिट करता है तो निकालने दूसरा साथी जाएगा। वहीं, एटीएम से रकम निकालने में अधिकतर दूसरे युवकों को लालच दिया जाता है। देहरादून की घटना में साइबर क्रिमिनल्स का कुछ इस तरह का ट्रेंड सामने आ रहा है।
एटीएम में संदिग्ध हरकत पर 14 फोटोग्राफ तैयार
साइबर क्राइम
- फोटो : Demo
एटीएम की सीसीटीवी फुटेज में संदिग्ध भूमिका को देखते हुए पुलिस ने 14 लोगों के फोटोग्राफ तैयार किए हैं। इनमें से सभी साइबर क्रिमिनल्स तो नहीं हो सकते, लेकिन हरकतों ने उन्हें शक के दायरे में ला दिया है। इनमें से कई तो कैमरे की तरफ देखकर मुंह चिढ़ाते नजर आ रहे हैं। फुटेज के निरीक्षण में साइबर एक्सपर्ट को जो संदेहास्पद लगा है, उसकी फोटो ली गई है। इनमें कौन बेकसूर है और कौन कसूरवार, यह तो विवेचना के दौरान ही साफ हो पाएगा
साइबर क्रिमिनल्स तक पहुंचने को पुलिस ने सरकारी और प्राइवेट कैमरों की अनगिनत फुटेज खंगाली है, जिसके आधार पर विवेचना को आगे बढ़ाया जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, अब तक एटीएम के सीसीटीवी फुटेज से संदिग्ध 14 युवकों के फोटोग्राफ निकाले गए है। इनमें दो से तीन लोग तो वेब कैमरा उतारने, जीरो बटन को जाम करने और काली टेप लगाते दिख रहे हैं।
जबकि, अन्य कई ऐसे हैं, जो एटीएम के अंदर बेवजह समय बिताकर उल-जुलूल हरकतें करते नजर आ रहे हैं। कुछ तो कैमरे के सामने खड़े होकर हाथ हिला रहे हैं। इनके बारे में अभी कुछ कह पाना मुमकिन नहीं है। असली क्रिमिनल्स के पकड़े जाने के बाद ही तस्वीर साफ हो पाएगी। साइबर एक्सपर्ट का कहना है कि एहतियात के तौर पर सारे फोटोग्राफ को जोड़ा गया है, ताकि शक की कोई गुंजाइश बाकी न रह जाए।