देहरादून के आदर्श विहार मोहल्ला निवासी पांच वर्षीय विभव रविवार को मम्मी-पापा की ‘शादी’ में पहुंचा। विभव के पिता डा. मेहरबान सिंह गुसाईं और मां रानी गुसाईं कैंप में मैरिज रजिस्ट्रेशन के लिए आए थे।
एसजीआरआर पीजी कालेज के इतिहास विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर डा. गुसाईं ने बताया कि उनकी शादी 20 अक्तूबर 2004 को हुई थी। शिविर की जानकारी के बाद उन्होंने अमर उजाला कार्यालय से फार्म लिया और जांच करवाने के बाद पंजीकरण कराने आए। उन्होंने अमर उजाला पहल की सराहना की।
मम्मी-पापा की फोटो खिंचवाने आए हैं
केवल विहार निवासी अभिनय कुमार जायसवाल पत्नी कल्पना जायसवाल और बच्चों आहना, अयाना के साथ कैंप में आए थे।
बच्चों को क्या पता था कि यहां उनके माता-पिता का मैरिज रजिस्ट्रेशन होना है। उन्होंने कहा कि वे मम्मी-पापा की फोटो खिंचवाने यहां आए हैं।
86 वर्षीय मां बनी बेटी की गवाह
सिंघल मंडी कारगी रोड निवासी 86 वर्षीय भूमा देवी बेटी अनीता और दामाद बलदेव राज के विवाह पंजीकरण में गवाह बनीं। भूमा ने कहा कि अमर उजाला की यह पहल सराहनीय और आम जनता के लिए मददगार है।
आजम-शबीना ने भी लगाई कानूनी मोहर
लक्खीबाग निवासी आजम खान और पत्नी शबीना ने शादी के एक साल बाद विवाह के बंधन में कानूनी मोहर लगवाई। पेशे से व्यवसायी आजम खान ने कहा कि सर्टिफिकेट के लिए कुछ देर इंतजार करना पड़ा, लेकिन इतना समय तो लगता ही है।
मधुसूदन उनियाल और सुधा ने शादी के तीन महीने बाद तो मनीष गौतम और नेहा ने तीन साल बाद रजिस्ट्रेशन करवाया। सबने अमर उजाला की जमकर तारीफ की।